बादली। सरसों फसल की कटाई-कढ़ाई कार्य किसानों के लिए महंगा सौदा बन रहा है क्योंंकि इस बार प्रति एकड़ 2 हजार रूपए अतिरिक्त भुगतने पड़ रहे हैं। ईंट-भट्ठों पर तूड़ी का प्रयोग बंद है जबकि पहले तूड़ी के बदले कुछ ठेकेदार सरसों की कटाई और कढ़ाई कार्य मुफ्त करवाते थे।
प्रति वर्ष सरसों की कटाई और कढ़ाई आसानी से हो जाती थी। ईंट-भट्ठों पर इंधन के तौर पर तूड़ी सप्लाई करने वाले ठेकेदार किसानों की सरसों की कटाई और कढ़ाई कार्य फ्री कर देते थे। ठेकेदार सिर्फ तूड़ी के बदले में सरसों की कटाई कार्य कर जाते थे जबकि अब ईंट-भट्ठों को जिग-जैग में तब्दील कर दिया गया है। जिनमें तूड़ी का प्रयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे में किसानों को सरसों की कटाई और कढ़ाई की आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। अब किसानों को एक हजार रूपए प्रति एकड़ कटाई और एक हजार रूपए कढ़ाई देनी पड़ रही है। राजेन्द्र, प्रवीन, जगबीर, दीपक, रामबीर और गणेश का कहना है कि 2 हजार रूपए की मार किसानों पर पड़ गई है जबकि तूड़ी का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है।