दिल्ली में लगाए स्टॉल पर समूह की महिला।
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केंद्र सरकार की ओर से नई दिल्ली में प्रतिवर्ष 14 से 27 नवंबर तक किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में इस बार ग्रामीण विकास मंत्रालय के सरस मेले का आयोजन भी किया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत झज्जर जिले में कार्यरत तीन सेल्फ हेल्प ग्रुप की सदस्यों की ओर से तैयार मधुबनी पेंटिंग, सजावटी सामान, वॉल पेंटिंग, साड़ी, दुपट्टा एवं महिला परिधान पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
डीसी श्याम लाल पूनिया ने कहा कि सेल्फ हेल्प समूह के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के हुनर को राष्ट्रीय फलक पर पहुंचाने के लिए हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सफल साबित हुआ है। जिले में इन समूहों की महिलाओं की ओर से सराहनीय कार्य किया जा रहा है। जिससे महिलाओं को स्थायी आजीविका का रास्ता सुगम हो रहा है। उन्होंने जिले में कार्यरत सेल्फ हेल्प ग्रुप की सदस्य महिलाओं की सराहना करते हुए कहा कि आपका हुनर जिले की पहचान बन रहा है और भविष्य में आपके कार्य जिला को नई ऊंचाई दिलाएंगे।
डीआरडीए के सीईओ प्रदीप कौशिक ने बताया कि हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जिले में 2456 स्वयं सहायता समूहों का सफल संचालन किया जा रहा है। इन स्वयं सहायता समूहों से जिला की 26512 की गरीब महिलाएं जुड़ी हैं। मिशन के अंतर्गत जुड़ी समूहों की सदस्यों की ओर से विभिन्न प्रकार की स्थायी आजीविका गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है जिससे उनके परिवार की आय वृद्धि होने से उनकी गरीबी कम हो रही है जो कि मिशन का मुख्य उद्देश्य है।
हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक योगेश पाराशर ने बताया कि जनवरी 2021 में एक सीमेंट कंपनी के सहयोग से ग्राम सासरौली, मातनहेल खंड में मधुबनी पेंटिंग संबंधित कौशल वर्धन प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण के दौरान 12 समूह की सदस्याओं की ओर से सफल प्रशिक्षण लिया गया। समूह की महिलाओं द्वारा उत्पादित उत्पादों को विभिन्न अवसरों पर प्रदर्शनी लगाकर बिक्री की जा रही है।
ट्रेड फेयर मेले में झज्जर जिले के गांव मातनहेल के आदर्श महिला संगठन की सुजाता, अमादलशाहपुर के जय गणेश स्वयं सहायता समूह की रेणू, सासरौली के स्वयं सहायता समूह के उत्पादों को जगह मिली है। झज्जर जिले के उत्पादों को मेला में विशेष तौर पर पसंद किया जा रहा है। मेला में आने वाले पर्यटक बड़ी संख्या में इन उत्पादों को खरीद रहें हैं। इन समूहों की उपलब्धि से अन्य स्वयं सहायता समूहों की सदस्य महिलाओं में उत्साह बढ़ा है।