गांव नूना माजरा के पूर्व सरपंच सुरेंद्र उर्फ गुल्लर की गोलियां मारकर हत्या करने का मामला घटना के बाद से ही इलाके में हर जगह चर्चा में है। गुल्लर की शुक्रवार शाम उनके व्यावसायिक वाहन गैराज में गोलियों से छलनी कर हत्या कर दी गई।
करीब 10 साल पहले नवंबर 2011 में नूना माजरा गांव के सरपंच सुरेंद्र उर्फ गुल्लर को दिल्ली पुलिस ने मकोका के तहत गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस उनको गिरफ्तार करने उनके गांव पहुंची तो समर्थकों ने विरोध किया था। उनके खिलाफ नरेला थाने में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) की धाराओं में मामला दर्ज था। नरेला के अलावा सदर बहादुरगढ़, भिवानी, सिविल लाइंस सोनीपत व दादरी थानों में भी गुल्लर के खिलाफ केस दर्ज थे। हालांकि अब वह अधिकतर मामलों में बरी हो चुका था।
दरअसल, कभी एक बहुत दबंग व्यक्ति की छवि वाले रहे सुरेंद्र गुल्लर पिछले कई साल से अपनी छवि में बहुत बदलाव ले आए थे। आजकल वह अपने गांव नूना माजरा और डाबोदा के बीच झज्जर रोड पर श्री बालाजी विश्कर्मा गैराज चलाते थे। उनके इस व्यावसायिक केंद्र में ट्रक, बस, जेसीबी और क्रेन आदि वाहन खड़े होते हैं। यहां ऐसे वाहनों की मरम्मत का इंतजाम भी है। उनका व्यवसाय अच्छा खासा चल रहा था। उनके गांव के निवासी एक युवक ने बताया कि व्यवसाय में मेहनत करने के साथ-साथ वह सामाजिक कार्यों में भी बहुत रुचि लेते थे। पिछले कार्यकाल में सरपंच रहते उन्होंने गांव में काफी विकास कार्य करवाए। उनके प्रभाव का गांव के सार्वजनिक कार्यों में लाभ मिला।
जरूरतमंदों की करते थे मदद
जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने में वह पीछे नहीं हटते थे। मंदिरों, गोशाला, खेल प्रतियोगिताओं में मदद करते। ग्रामीणों में आपस में विवाद हो जाए तो उसको सुलझाने का प्रयास करते। बताया गया है कि फिलहाल वह परिवार में एक घरेलू कार्यक्रम की तैयारी में लगे थे।