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टीकरी बार्डर खुलवाने की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई शुरू

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क्षेत्र के उद्योगपतियों के सबसे बड़े संगठन बहादुरगढ़ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज ने दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है। याचिका पर बुधवार को सुनवाई शुरू हुई। न्यायालय ने अगली सुनवाई से पहले इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित तीनों जनहित याचिकाओं की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध करवाने का आदेश दिया है।
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बीसीसीआई की जनहित याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति अमित बंसल की अदालत में सुनवाई शुरू हुई। बीसीसीआई की ओर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरिन्दर छिकारा और भारत सरकार, हरियाणा सरकार व दिल्ली पुलिस के वकील भी अदालत में उपस्थित हुए। भारत सरकार के वकील ने कहा कि इसी तरह की तीन याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं इसलिए सुप्रीम कोर्ट को उन मामलों के भाग्य का फैसला करने दें। अपने सहयोगी वकीलों के साथ पेश हुए बीसीसीआई के वकील मनोज चौहान ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि बीसीसीआई की याचिका पूरी तरह से अलग है। उन्होंने दिल्ली पुलिस को पार्टी बनाया है और बॉर्डर सील करने के लिए दिल्ली पुलिस ही जिम्मेदार है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रस्तुत याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं से कैसे/कितनी अलग है, यह जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं के तथ्यों को सत्यापित किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश ने न्यायालय और याचिकाकर्ता को उन लंबित याचिकाओं के तथ्यों का पता लगाने का निर्देश दिया ताकि इस न्यायालय द्वारा कोई विपरीत आदेश पारित न किया जा सके। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह सर्वोच्च न्यायालय के साथ ऐसी किसी भी याचिका के लंबित होने के तथ्यों को तत्काल पेश करे।
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अधिवक्ता मनोज चौहान ने तर्क दिया कि एंबुलेंस को भी टीकरी बार्डर से गुजरने के रास्ता नहीं दिया जाता। न्यायालय ने भारत सरकार के वकील से एंबुलेंस को अनुमति नहीं देने के तथ्यों के बारे में पूछा तो भारत सरकार के वकील ने कहा कि इस बारे में जानकारी जुटाकर वह अदालत को तथ्यों की जानकारी देंगी। न्यायालय ने बीसीसीआई के वकील को उचित आदेश पारित करने के लिए लंबित मामलों के तथ्य तुरंत उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई के लिए अदालत की ओर से 15 नवंबर की तारीख दी गई।
बुधवार को उच्च न्यायालय ने सुनवाई हुई। हम सर्वोच्च न्यायालय में लंबित तीनों याचिकाओं की प्रमाणित प्रति दो हफ्ते के भीतर उच्च न्यायालय को उपलब्ध करवाने की कोशिश करेंगे। ताकि अगली सुनवाई 15 नवंबर से पहले ही हो सके। - मनोज चौहान, अधिवक्ता, दिल्ली उच्च न्यायालय
टीकरी बार्डर बंद रहने से उद्योगों को हर रोज करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। दूसरे सभी लोग भी दुखी हैं। एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिलता। हमें इस जनहित याचिका के माध्यम से जल्द ही टीकरी बार्डर खुलने की बहुत उम्मीद है। - नरिन्दर छिकारा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, बीसीसीआई
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