बहादुरगढ़ में तीन साल से सहमति संबंध में रह रही दो युवतियों को कुछ दिनों से उनके परिवारवालों ने उनके घरों में रोक रखा था। एक युवती किसी तरह अपने घर से मुक्त होकर निकल गई और महिला आयोग, दिल्ली से मामले की शिकायत की। आयोग के दखल के बाद शुक्रवार को वन स्टॉप सेंटर की टीम ने दूसरी युवती को उसके घर से मुक्त करवाया। परिजनों से छुड़ाई गई युवती को उसकी सहेली के साथ एनजीओ के सुपुर्द कर दिया गया है, जहां वह साथ-साथ रह सकेंगी।
सखी वन स्टॉप सेंटर झज्जर की इंचार्ज सुमन ने बताया कि एक पखवाड़े पहले महिला आयोग, दिल्ली से आदेश मिले थे कि बहादुरगढ़ में एक युवती को उसके परिजनों ने उसी के घर में ‘बंधक’ बना रखा है। इस पर टीम ने युवती के घर पहुंचकर परिवार के सदस्यों से बातचीत की और उसे घर से आजाद कराया।
दोनों एक साथ रहना चाहती थीं, घरवाले थे खिलाफ
सखी सेंटर से मिली जानकारी के मुताबिक अपने घर में ‘बंधक’ बनाई गई (रोककर कर रखी गई) एक युवती का पड़ोस की अन्य युवती के साथ तीन साल से सहमति संबंध था। दोनों एक साथ रहना चाहती थीं। लेकिन, जब उनके घरवालों को यह बात पता चली तो उन्होंने दोनों का मिलना-जुलना बंद करा दिया और अपने-अपने घरों से बाहर निकलना बंद करवा दिया। कुछ दिन बाद एक युवती ने अपने परिजनों को भरोसा दिलाया कि वह युवती से रिश्ता नहीं रखेगी। इस पर परिवार के सदस्यों ने उसे घर में रोकना छोड़ दिया था।
दिल्ली जाकर एनजीओ से साधा संपर्क
घर से आजाद होकर युवती दिल्ली पहुंची और एक एनजीओ से संपर्क किया। वहां रहकर उसने महिला आयोग, दिल्ली को ई-मेल के जरिये शिकायत भेज दी। महिला आयोग दिल्ली ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए वन स्टॉप सेंटर, झज्जर से संपर्क कर बहादुरगढ़ के घर में ‘बंधक’ बनाई गई युवती को आजाद करने के आदेश दिए थे।
बहादुरगढ़ क्षेत्र की दो युवतियां सहमति संबंध में थीं। परिजनों ने दोनों को अपने-अपने घर में बंधक जैसा बना रखा था। एक युवती किसी तरह दिल्ली पहुंची और महिला आयोग को शिकायत दी। आयोग के आदेश पर हमने दूसरी युवती को मुक्त करवा उसे दिल्ली के एनजीओ के पास छोड़ दिया है।
-सुमन, इंचार्ज, वन स्टॉप सेंटर, सखी झज्जर