नूह हिंसा में सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि उनके इस्तीफे मंजूर नहीं हुए हैं। बल उपासना केंद्र और मिलन केंद्रों का संचालन नहीं होगा। मांगी करी कि मामन खान की तुरंत गिरफ्तारी हो, मोनू मानेसर को छोड़ा जाए।
नूंह हिंसा में सरकार की नाकामी से नाराज बजरंग दल के पदाधिकारियों ने गुरुवार को सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया। बजरंग दल की टीम ने नूंह हिंसा पर सवाल भी उठाए हैं। कार्यकर्ताओं ने सरकार के सामने मोनू मानेसर को रिहा करने और कांग्रेस विधायक मामन खान को गिरफ्तार करने समेत छह मांगें रखीं।
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कहा है कि मांगें पूरी होने तक वे बल उपासना केंद्र और मिलन केंद्रों का संचालन भी नहीं करेंगे। विश्व हिंदू परिषद के अधिकारियों ने इस युवा टीम को समझाने की बहुत कोशिश की और इस्तीफा मंजूर नहीं किया।
बजरंग दल के रोहतक विभाग संयोजक नीरज वत्स ने अपनी पूरी टीम के साथ बजरंग दल के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने नूंह में हुई हिंसा पर सरकार की नाकामी पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि भाजपा सरकार हिंदू धर्म को मुद्दा बनाकर सत्ता में आई थी और आज वह सत्ता पर काबिज रहने के लिए तमाम तरह के समझौते कर रही है।
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उन्होंने मोनू मानेसर की गिरफ्तारी को भी गलत ठहराया है। उनका कहना है कि जल्द सरकार को मोनू मानेसर को रिहा करना चाहिए और कांग्रेस विधायक मामन खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करना चाहिए।
उन्होंने हिंसा के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और मारे गए आम लोगों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने, घायलों को उचित इलाज मुहैया करवाने व उन्हें मुआवजा देने और हिंसा पीड़ित बजरंग दल व अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेने की मांग भी की। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने मांगें पूरी नहीं होने तक बजरंग दल के बल उपासना केंद्र और मिलन केंद्रों पर कार्यक्रमों का संचालन नहीं करने की भी घोषणा की है।
इस्तीफा स्वीकृत होने न होने के संबंध में नीरज वत्स ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के झज्जर जिला कार्यवाह समेत संघ परिवार के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बजरंग दल के नाराज कार्यकर्ताओं से बातचीत की है और कहा कि इस्तीफा मंजूर नहीं किया जाएगा।