साल्हावास। क्षेत्र के सेहलंगा गांव के किसान विकास डागर की बेटी मुस्कान को यूपीएससी की परीक्षा में 72 वां स्थान मिला है। मुस्कान ने कामयाबी दूसरे ही प्रयास में हासिल की है। पहले प्रयास में उसकी 474 वीं रैंक थी लेकिन वह संतुष्ट नहीं थी। मुस्कान की सफलता में उसके दादा की प्रेरणा और पिता का साथ अहम रहा। परिवार में खुशी का माहौल है। पूरे गांव को बेटी की कामयाबी पर नाज है।
23 वर्ष की मुस्कान ने एपीजे स्कूल चरखी दादरी से 2015 में दसवीं और 2017 में 12वीं की परीक्षा पास की थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से 2020 में ग्रेजुएशन की। कोरोना काल में लॉक डाउन लगने पर उसने अपने घर पर ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। मुस्कान ने बताया कि उसने पहले भी यूपीएससी परीक्षा दी थी। जिसमें उसकी 474वीं रैंक आई थी लेकिन वह उस रैंक से संतुष्ट नहीं थी। उन्होंने बिना कोचिंग लिए घर पर ही इसकी दोबारा से तैयारी की। दूसरे प्रयास में 72 वां स्थान प्राप्त किया। मुस्कान ने बताया कि वह रोजाना लगभग 14 घंटे पढ़ाती थी। उसका कहना है कि यदि मन में कुछ करने की ठान लो और घर पर ही उसकी पूरी मेहनत से तैयारी कर लो तो किसी कोचिंग भी जरूरत भी नहीं होती। मुस्कान डागर के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। सेहलंगा के सरपंच अशोक, राजेश धनखड़, सुनील डागर, संजय डागर, वजीर सिंह आदि ने मुस्कान के परिजनों को बधाई दी है।
पिता बोले- बेटी के सपने पूरे करुंगा
मुस्कान के पिता विकास डागर बीए पास हैं और एक एकड़ जमीन के मालिक हैं। वे जमीन माल बटाई में लेकर खेतीबाड़ी का काम करते हैं और उनकी माता प्रतिभा इतिहास विषय से एमए हैं और गृहणी हैं। माता- पिता ने अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपनी सारी कमाई उनकी शिक्षा पर लगा दी। उनका कहना है कि बेटी में कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो फिर वे उसके सपने पूरे अवश्य कराएंगे।
दादा की प्रेरणा से मिली मुस्कान को सफलता
मुस्कान डागर के दादा रामहेर डागर बैंक में मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हैं। दादा रामहेर डागर व दादी फूलवती से प्रेरणा पाकर मुस्कान को हमेशा ही कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती रही है। उसके दादा उसे हमेशा बड़ा अधिकारी बनने की प्ररेणा देते थे। पहले प्रयास में ही उसने 474 रैंक हासिल किया और दूसरे प्रयास में 72 वां रैंक लाकर यह सिद्ध कर दिया कि ग्रामीण बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। मुस्कान डागर के पिता विकास डागर ने बताया कि हिंदू लिटरेचर सोसाइटी के संपर्क में व दादा के सहयोग से ही मुस्कान ने यह उपलब्धि प्राप्त की है। मुस्कान के दादा रामहेर सिंह और दादी फूलवती देवी ने मिठाई खिलाकर मुस्कान को आशीर्वाद दिया। भाई दक्ष डागर ने हाल ही में एमबीए करने के लिए प्रवेश परीक्षा दी है।