जिले में इन दिनों डीएपी खाद के लिए मारामारी चल रही है। पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने से किसानों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। किसानों को कई दिन चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। खाद न मिलने के कारण सरसों की बिजाई का कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
फसल की बिजाई से पूर्व खेत में डाली जाने वाली डीएपी खाद की कमी के चलते किसानों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। किसान सुबह ही खाद बिक्री केंद्रों पर पहुंच जाते हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी डीएपी खाद की कोई कमी नहीं बता रहे हैं, लेकिन किसानों को खाद के लिए इधर-उधर भटकने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जिले में खाद की बिक्री के लिए 40 पैक्स व 12 निजी थोक विक्रेता व 110 खाद-बीज की दुकानें हैं। इसके बावजूद जिले के किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल रहा है।
एक एकड़ में एक कट्टा डाला जाता है खाद
फसल बिजाई से पूर्व एक एकड़ भूमि में एक कट्टा डीएपी खाद डाला जाता है। खाद बोने के 48 से 72 घंटे बाद उसमें फसल की बिजाई की जाती है। जिले में कृषि विभाग के आंकड़ों के करीब 35 हजार हेक्टेयर भूमि में सरसों व करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि में गेहूं की बिजाई होती है। इस हिसाब से करीब करीब साढ़े लाख कट्टे डीएपी खाद के जिले के किसानों को चाहिए।
किसानों को जरूरत के मुताबिक नहीं मिल रहा खाद
किसानों को 2 स 5 बैग खाद दिया जा रहा है। सरसों की बिजाई से पूर्व किसानों ने खेतों को तैयार करना शुरू कर दिया है। जिले में फिलहाल सरकारी व प्राइवेट दुकानों पर केवल 1100 एमटी खाद विभाग के आंकड़ों के अनुसार बचा हुआ है। जिसमें से किसानों को 2 से 5 बैग तक खाद वितरित किया जा रहा है।
किसानों की परेशानी, उन्हीं की जुबानी