बादली। सुबह पाला जमने से ठिठुरन बढ़ गई है। इसका असर पर दूध, फल व सब्जियों पर दिखने लगा है। ठंड से सब्जियों की फसल जहां खराब होने लगी है वहीं घने कोहर से गांवों से शहरों में दूध की सप्लाई बाधित होने लगी है। तापमान घटने से गेहूं की खेती को फायदा है, लेकिन सरसों में तो कोहरे और पाले से चेपा रोग भी लगने लगा है जिससे किसान चिंता में हैं।
क्षेत्र में इस समय खेतों में टमाटर, बैंगन, गाजर की फसलें हैं। तीनों में ही पाला जमने से नुकसान की आशंका बनी हुई है। इसके साथ ही काफी किसान नए सिरे से टिंडा व बेल फसलों की बिजाई में व्यस्त है, लेकिन पाला को देखकर अभी देरी कर रहे हैं। सुबह किसान खेतों में पहुंचते है, तो फसलों का रंग हरे के बजाय पाले से सफेद मिलता है। इससे सब्जियों की फसलों में काफी नुकसान की आशंका है। सुबह के समय फसलों पर इसका जमाव होने से नुकसान की आशंका प्रबल है।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक सरसों की फसल ज्यादा ठंड सहन नहीं कर पाती। ज्यादा कोहरा होने पर चेपा रोग की समस्या पैदा होती है। पिछले चार दिनों से प्रतिदिन कोहरा पड़ रहा है। दिनों दिन तापमान में गिरावट आई है। रविवार की रात न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस रहा। कृषि विभाग के एसडीओ सुनील कौशिक का कहना है कि गेहूं की खेती पर ठंड का फायदा होता है। सरसों पर बुरा प्रभाव मेड़ के आसपास नजर आ रहा है। इससे बचाव के लिए किसानों को आवश्यक दवाई का छिड़काव करना चाहिए। इसके अतिरिक्त किसानों को विस्तार से जैविक खाद के लाभ लेना चाहिए।