नाटक का मंचन करते रोहतक के कलाकार।
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बहादुरगढ़। पंजाब के 70 वर्षीय लोक कवि संत राम उदासी ने नयागांव चौक के पास हुई किसानों की सभा में लोकगीत सुनाकर आंदोलनकारी किसानों का हौसला बढ़ाया। इस मौके पर किसान नेताओं ने कहा कि उदासी का जनहितैषी साहित्य हमेशा सूर्य की तरह चमकता रहेगा। इतिहास ने दिखाया है कि 50 साल पहले लिखे और गाए गए गीत आज की परिस्थितियों के अनुरूप हैं। जनवादी जटिल नाटक केंद्र रोहतक की टीम ने मॉर्निंग विल कम समटाइम नाटक का मंचन किया।
मंच से सभा को संबोधित करते हुए किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से बचने के लिए हाल ही में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 26वें जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें 200 देशों के प्रतिनिधियों और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाग लिया था। पर्यावरण को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जो कहा, उससे हम भारत के मेहनतकश लोग पूछना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के प्रतिनिधियों के समक्ष झूठ बोलते हैं। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ और झारखंड के जंगलों में रहने वाले आदिवासी लोगों के पास इन राज्यों के पहाड़ों और वन भूमि के नीचे बहुत सारी कीमती धातुएं हैं। कॉर्पोरेट घराने इस अमूल्य संपत्ति को कौड़ियों के दर पर लूट रहे हैं। मेहनतकश लोगों की झुग्गियों में आग लगाई जा रही है।
उगराहां ने कहा कि भारत के कई राज्यों में उपजाऊ जमीन थी जिसे किसानों से छीन कर अडानी अंबानी को सौंप दिया गया। पिछले एक साल से भारत के मेहनतकश लोग दिल्ली में विभिन्न सीमाओं पर अपनी जमीन की रक्षा के लिए केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा पेश किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहे हैं। मंच सचिव की भूमिका संगरूर जिले के नेता हरपाल सिंह धुरी ने निभाई और मानसा जिला महासचिव इंद्रजीत सिंह झब्बर और परमजीत कौर बोड़े ने भी मंच से संबोधित किया।