अब खेती के साथ-साथ किसान भी बिजली का उत्पादन कर सकेंगे। केंद्र सरकार की तरफ से शुरू की गई कुसुम योजना के तहत सौर ऊर्जा से सोलर प्लांट लगाकर किसान बिजली निगम को बिजली बेच सकेंगे। वहीं अपने घर व संस्था की बिजली की आपूर्ति कर सकेंगे। इसके बाद बचने वाली बिजली को बिजली निगम को बेचा जा सकेगा। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन करने वाले किसानों व संस्थाओं को तीन रुपये से अधिक प्रति यूनिट बिजली निगम की तरफ से अदायगी की जाएगी। जबकि सौर ऊर्जा पैनल सिस्टम से तैयार की जाने वाली बिजली से वे अपना बिजली का खर्च भी कम कर सकेंगे। इतना ही नहीं चिह्नित किए गए पावर हाउसों के पांच किलोमीटर के दायरे में किसान इसका लाभ उठाने के लिए सोलर पावर प्लांट लगा सकेंगे। प्रदेश में करीब 127 आवेदन इस योजना के लिए किए गए है। इनमें से कुछ किसानों के आवेदन पूरे नहीं हो पाए है। जबकि झज्जर जिले में भी 11 आवेदन किए गए है। जिले के करीब पांच किसानों व समूहों की आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी कमी है।
जिले में तीन पावर हाउस किए चिह्नित
कुसुम योजना के तहत सरकार की तरफ से झज्जर जिले के तीन पावर हाउस चिह्नित किए गए है। इन पावर हाउसों में जहाजगढ़, दूबलधन और बाढ़सा पावर हाउसों को शमिल किया गया है। इन पावर हाउसों के पांच किलोमीटरों के दायरे सोलर पावर प्लांट लगाकर किसान बिजली का उत्पादन सौर ऊर्जा से कर सकेंगे। इसके लिए किसानों को सरकार की तरफ से आर्थिक मदद दी जाएगी। सरकार भी इस योजना को बढ़ावा देने के लिए आम बजट में भी बजट का प्रावधान रख चुकी है। किसान अपने खेतों में सिंचाई के लिए सोलर सिस्टम लगाकर ट्यूबवेल भी चला सकेंगे। झज्जर जिले में काफी किसानों को ट्यूबवेलों पर पहले भी सोलर सिस्टम लगाए जा चुके है। इसमें जिले के साल्हावास खंड को शामिल किया गया था। पांच सौ से दो हजार किलोवाट के सोलर सिस्टम लगा सकेंगे।
सरकार कुसुम योजना को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। यह योजना दूसरा विभाग देख रहा है। अगर किसान बिजली सौर ऊर्र्जा से बिजली पैदा कर निगम को देंगे तो पावर हाउसों में इसके लिए व्यवस्था की जाएगी।
एसके जैन, एसई, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम।