लगभग 11 माह से दिल्ली के टीकरी बार्डर पर बैठकर आंदोलन कर रहे किसानों ने तीनों कृषि कानूनों को अभी तक निरस्त नहीं किए जाने पर सरकार के खिलाफ कड़ा रोष जताया। शनिवार को केंद्र, हरियाणा व उत्तर प्रदेश सरकार के पुतले फूंक कर नारेबाजी। सरकार को चेताया कि आंदोलन चाहे कितना ही लंबा क्यों न चले वे भी तब तक पीछे हटने वाले नहीं हैं जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मान लेती। किसानों ने कहा कि सरकार पूरी तरह से हठधर्मिता पर अड़ी है। किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन किसानों के प्रति सरकार की कोई हमदर्दी नहीं दिख रही।
बीकेयू डकोंदा से मास्टर अमरजीत सिंह ने टीकरी बार्डर मंच से किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार हमारी जमीन को छीनना चाहती है। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन लड़कर हमें जमीनों का मालिक बनाया था हमें हमारे हक दिलवाए थे। मगर मोदी सरकार हमसे ये सारे हक छीना चाहती है। उन्हीं हकों को लेने के लिए साढ़े 10 महीने से ज्यादा समय से किसान सड़कों पर बैठे हुए हैं। बंदा बहादुर ने भी जमीनों के लिए लड़ाई लड़ी थी और जीत प्राप्त की थी। उसके बाद शहीद चाचा अजीत सिंह ने भी जमीनों के लिए लड़ाई लड़ी थी और जमीनी हक प्राप्त किए थे। उसके बाद अब पूरे देश के किसानों को मोदी सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ रही है ,अपने जमीनी हकों के लिए।
कलविंदर सिंह ने कहा, मोदी सरकार बोलती है कि पूरे देश में नशे के कारोबार को खत्म करेंगे और वह जो नशे का कारोबार करते हैं, उनको सजा दिलाएंगे। पिछले दिनों में बंदरगाह के ऊपर बहुत बड़ी मात्रा में नशे के पदार्थ मिले हैं, मगर उसके ऊपर मोदी सरकार कोई बात नहीं करती और ना ही कोई सख्त कार्यवाही करती है। क्योंकि यह सरकार कारर्पोरेट घरानों की है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ पूरे भारत के मजदूर, किसान और लोग अपने हकों की लड़ाई लडने के लिए सड़कों पर बैठ कर सरकार को चेतावनी देते हैं कि सीटेट के अंदर जो अभी धान की फसल लगी हुई है और मंडियों में पड़ी हुई है किसानों की वह फसल टाइम से खरीदी नहीं जा रही। किसानों को फसल के ऊपर ठीक तरह की खरीद भी नहीं की जा रही।