बादली। चौधरी धीरपाल सिंह राजकीय महाविद्यालय बादली में हिंदी विषय के स्नातकोत्तर कोर्स में दाखिला प्रक्रिया शुरू करने के लिए आदेश जारी हो गए हैं। उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेशों में दाखिला प्रक्रिया शुरू करने के साथ-साथ शेड्यूल के अनुसार कक्षाएं शुरू करवाने के निर्देश दिए गए हैं। कॉलेज में इसी सत्र से हिंदी विषय लागू होने से प्राचार्य आनन्द कादयान ने खुशी जाहिर की। जबकि, आसपास के छात्रों और अभिभावकों ने भी मांग पूरी होने पर शिक्षा विभाग का आभार प्रकट किया है।
प्राचार्य आनन्द कादयान ने बताया कि दाखिला को आवेदन लिए 9 दिसंबर तक पोर्टल खोला गया है। दाखिला प्रक्रिया ऑनलाइन है जिसके लिए कालेज में अलग से काउंटर बनाया गया है। महाविद्यालय की स्नातक कक्षा में 95 विद्यार्थियों के पास हिंदी विषय है जिनमें 61 छात्राएं हैं। छात्राएं स्नातक करने के बाद शहरों की ओर जाती थीं जिसमें बहादुरगढ़, झज्जर और सोनीपत हैं। अधिकतर छात्राएं यहां हिंदी एमए कोर्स नहीं होने से स्नातकोतर की पढ़ाई नहीं कर पाती हैं और स्नातक के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं। लेकिन अब स्थानीय कालेज में हिंदी में एमए शुरू होने से छात्राओं को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। बादली महाविद्यालय में 60 सीटों की मंजूरी के साथ दाखिला प्रक्रिया शुरू करने के आदेश हो गए हैं। बता दें कि अमित छनपाड़िया और होशियार सिंह दरियापुर के नेतृत्व में अक्तूबर माह में दर्जनों गांवों की पंचायतों ने सीएम विंडो में शिकायत देकर कालेज में स्नातकोत्तर कोर्स शुरू करवाने की मांग की थी। गांव दरियापुर, लगरपुर, बाढ़सा, मुंडाखेड़ा, देवरखाना, लाडपुर, बुपनियां, जहांगीरपुर, माजरी, गुभाना, पेलपा और लुकसर की पंचायतों ने इसके लिए प्रयास किए थे। अमित ने कहा कि छात्राओं को बाहर जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता था। अधिकतर छात्राओं को शिक्षा से वंछित भी होना पड़ता था क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में यातायात के साधनों का अभाव है। ग्रामीणों का कहना था कि बादली के राजकीय महाविद्यालय में हिंदी विषय की आवश्यकता को देखते हुए कक्षाएं शुरू करवाई जाए। मांग पूरी होने पर होशियार सिंह, अमित छनपाडिय़ा के साथ महाबीर, सुखबीर, राजकुमार, धर्मबीर, जयपाल गुलिया, रणबीर, सुरेश, रामकिशन, प्रवीन, सचिन और उमेद सहित ग्रामीणों ने मांग पूरा करवाने में प्राचार्य आनन्द कादयान की कार्यशैली की सराहना की। हिंदी विषय में दाखिला प्रक्रिया के लिए महाविद्यालय में सभी प्राध्यापकों के साथ मिलकर एक कमेटी का गठन किया गया है जिसमें प्राध्यापकों को जिम्मेवारियां सौंपी गई है ताकि दाखिला के लिए छात्रों को परेशानी न हो।