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आर्कटिक पर जाएंगे भारतीय वैज्ञानिक

Sat, 15 Jun 2013 01:49 AM IST
ओम प्रकाश
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दक्षिणी ध्रुव पर स्थित अंटार्कटिका की तरह ही अब भारतीय वैज्ञानिक मौसम संबंधी अध्ययन के लिए उत्तरी ध्रुव स्थित आर्कटिक को भी अपना बेस बनाएंगे। इसकी तैयारी शुरू हो गई है।
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फरीदाबाद स्थित जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) के एकमात्र अंटार्कटिका डिवीजन को ध्रुवीय अध्ययन केंद्र बना दिया गया है। अब यहां के वैज्ञानिक दोनों ध्रुवों का अध्ययन करेंगे।

यहां के कुछ वैज्ञानिक एक बार आर्कटिक हो आए हैं और अब सरकार ने उन्हें इस केंद्र पर भी जोर देने को कहा है। ऐसे में अगस्त या सितंबर में वैज्ञानिक आर्कटिक जाने की तैयारी कर रहे हैं।
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फरीदाबाद के दो और लखनऊ स्थित जीएसआई के ग्लेशियर डिवीजन के तीन वैज्ञानिक आर्कटिक जाएंगे।

आर्कटिक जा चुके भू-वैज्ञानिक अमित कुमार स्वाइन के मुताबिक आर्कटिक पर भी जलवायु परिवर्तन से संबंधित ही अध्ययन होंगे। वहां भारत का हिमाद्री नाम का स्टेशन है।

आर्कटिक पर खोज में जुटे 12 देशों के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक मेस बनाया है जिसमें भारतीय वैज्ञानिकों का भी खाना होगा। इन देशों में नार्वे, जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं।

आर्कटिक एक महासागर है, जो चारों ओर जमीन से घिरा हुआ है। इसके किनारे पर उत्तरी ध्रुव से लगभग 12 सौ किमी दूर एक छोटा द्वीप ‘स्वालबर्ड’ है। इसी पर हमारे वैज्ञानिक पहुंचेंगे। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका करीब 60 फीसदी भाग ग्लेशियरों से ढका हुआ है।

ग्लेशियर पर करेंगे अध्ययन
भारतीय वैज्ञानिकों ने इस द्वीप पर स्थित ‘वेस्त्रे ब्रोगरब्रीन’ नामक ग्लेशियर को अध्ययन के लिए चुना है। यह आर्कटिक के तट पर स्थित ‘न्यू एलेसन्ड’ नामक बस्ती के पास है। इस ग्लेशियर का क्षेत्रफल 4.69 वर्ग किमी है।

धरती का सबसे उत्तरी स्थान है ‘न्यू एलेसन्ड’
वैज्ञानिकों के मुताबिक न्यू एलेसन्ड हमारी धरती का वह सबसे उत्तरी स्थान है जहां साल भर आबादी रहती है। गर्मी के मौसम में यहां की जनसंख्या लगभग 150 व्यक्तियों की हो जाती है।
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यहां औसत तापमान -5.8 डिग्री सेल्सियस रहता है। सर्दी के मौसम में इसका तापतान -46.3 डिग्री सेल्सियस तक जाता है और जनसंख्या घटकर 30 रह जाती है।
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