बेटा और बेटी के प्रेम विवाह के बाद सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहे अलग-अलग गांव निवासी दो परिवारों को पांच साल बाद सितंबर 2023 में कोर्ट से न्याय मिला है। एसीजेएम रामअवतार पारिक की कोर्ट ने इस मामले में 36 लोगों पर केस दर्ज करने का आदेश दिया और कोर्ट के आदेश के 40 दिन बाद झोझूकलां थाना पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया है। वहीं, अपनी ड्यूटी का सही से निर्वहन नही करने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कोर्ट ने जांच करने का भी आदेश दिया हुआ है। जिन 36 लोगों के खिलाफ केस दर्ज गया है उनमें से एक की मौत हो चुकी है।
सिरसा में नाबालिग को बहला कर उसके साथ कई बार दुष्कर्म कर चुके शादीशुदा युवक को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 20 साल कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इस मामले में ऐलनाबाद थाना पुलिस ने पीड़ित नाबालिग की मां की शिकायत पर आरोपी नरेंद्र उर्फ मोनू के खिलाफ अभियोग दर्ज किया था। मामले में अहम बात यह कि नाबालिग न्यायालय में गवाही के दौरान अपने पूर्व में दिए बयान से मुकर गई थी।
न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने गहनता से मामले की सुनवाई की और विवेक के आधार पर आरोपी नरेंद्र को मामले में दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए 20 साल कैद की सजा सुनाई। वार्ड नंबर 7 निवासी नरेंद्र ने दोस्ती के बाद 25 अगस्त 2019 को नाबालिग लड़की को नशे की गोलियां दी और कहा कि इसे घरवालों के भोजन में मिला देना। उसकी बातों में आकर नाबालिग ने गोलियां भोजन में मिला दी।
भोजन के बाद घरवाले गहरी नींद में सो गए। इसके बाद देर रात को नरेंद्र नाबालिग को लेकर फरार हो गया। पड़ताल करने पर पता चला कि नरेंद्र नामक युवक उसे भगाकर ले गया है। इसके बाद परिजनों ने थाने में जाकर शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस ने आरोपी नरेंद्र के खिलाफ केस दर्ज करके कुछ दिनों बाद उसे गिरफ्तार कर लिया था।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दहेज हत्या के मामले में 29 जुलाई को आरोपी पति व सास-ससुर को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई। फैसला सुनाए जाने से पहले दोषियों ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार से सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई। इस पर न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने कहा कि दहेज उत्पीड़न की घटनाएं सभ्य समाज के माथे पर कलंक के समान है। इसलिए कठोर दंड देना बहुत आवश्यक है।
पंजाब के जिला मानसा के गांव गराघनां निवासी मलकीत सिंह ने 18 वर्ष पहले अपनी साली रूपा की बेटी वीरपाल कौर को गोद लिया था। 2015 में मलकीत ने बेटी वीरपाल कौर की शादी सिरसा के गांव मांगेआना निवासी केवल सिंह से कर दी। वीरपाल कौर ने जब पुत्र को जन्म दिया तो उसका पति केवल सिंह बाइक की मांग करने लगा। बाइक नहीं मिलने पर उसका पति केवल सिंह,ससुर स्वराज सिंह व सास बीरा देवी वीरपाल कौर से मारपीट करने लगे।
16 जून 2019 को सुबह वीरपाल ने अपनी मां को फोन कर बताया कि ससुराल वाले उसके साथ मारपीट कर रहे हैं। शाम को 6 बजे केवल सिंह का फोन आया कि वीरपाल ने कमरे के अंदर चुन्नी से खुद को फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। इस मामले में केवल सिंह से पुलिस पूछताछ में कबूल किया कि आत्महत्या करने वाले दिन उसने अपने पिता स्वराज व मां बीरा देवी के कहने पर वीरपाल कौर से झगड़ा किया।
अफीम तस्करी में 3 मई को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने दो आरोपियों को 15-15 साल कैद व एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस मामले में एक आरोपी की केस की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई थी। मामले के अनुसार नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो चंडीगढ़ की टीम को 22 मई 2017 को सूचना मिली थी कि राजस्थान के जिला कोटा निवासी कृष्ण मुरारी व राम कुमार प्राइवेट बस में सवार होकर जयपुर से ऐलनाबाद आने वाले हैं।
दोनों अफीम तस्करी का कारोबार करते हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो चंडीगढ़ की टीम ने ऐलाबाद में अपना जाल बिछा दिया और बस से उतरते ही टीम ने उनको शक के आधार पर हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान उक्त दोनों के पास से 4 किलो 450 ग्राम अफीम बरामद हुई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुलदीप सिंह ने दोनों को दोषी करार देते हुए 15-15 साल कैद की सजा सुना दी। संदेश यह कि नशा तस्करी से युवा पीढ़ी को तबाह करने वाले रहम के काबिल नहीं हैं।
टोहाना के जलेबी बाबा पर आरोप था कि वह झाड़ फूंक के बहाने महिलाओं को अपने अलग कमरे में ले जाता था और यहां पर उनसे दुष्कर्म करता था। उसने कई महिलाओं को शोषण का शिकार बनाया था। जुलाई 2018 में बाबा की एक वीडियो वायरल हुई थी, जिसमें उसके कुकर्म दिखाई दे रहे थे। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए 20 जुलाई 2018 को जलेबी बाबा को गिरफ्तार कर लिया था। 11 जनवरी 2023 को अदालत ने जलेबी बाबा को दोषी मानते हुए उसे 14 साल की सजा सुनाई।
फतेहाबाद के न्यायिक परिसर में 14 अक्तूबर 2023 को स्पेशल पारिवारिक विवाद निवारण लोक अदालत आयोजित की गई थी। इस लोक अदालत में पारिवारिक मामलों के 148 केस रखे गए थे, जिनमें से 48 केसों का अदालत ने निपटारा करके इन परिवारों को बिखरने से बचा लिया।
भिवानी जिले के गांव बड़ेसरा में वर्ष 2017 में महिला सरपंच की आरटीआई लगाने से विवाद हुआ था, इसके बाद से दोनों पक्षों में रंजिश हो गई थी। इसी रंजिश में बलजीत और उसके परिवार के पांच लोगों की हत्या की जा चुकी है। जबकि दूसरे पक्ष से एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या की गई है। अब तक हत्याकांड में छह लोगों की हत्या हो चुकी है। बहुचर्चित बड़ेसरा बलजीत, उसके चाचा भल्लेराम और ताऊ महेंद्र की हत्या मामले में अदालत ने 17 अगस्त 2023 को 18 दोषियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
भिवानी जिले के कस्बा बवानीखेड़ा में होलिका दहन के दौरान अग्नि के अंदर से प्रहलाद निकालने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। जिसमें 55 वर्षीय सुरेश देवी व 30 वर्षीय मनवीर को गंभीर चोटें आई थी, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। भिवानी में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केपी सिंह की अदालत ने नवंबर 2023 में दोहरे हत्याकांड में 16 लोगों को दोषी करार देते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया। मामला 2020 का है। होलीका दहन के दौरान अग्नि के अंदर से प्रहलाद निकलने को लेकर झगड़ा हुआ था। जिसमें सुरेश देवी व मनवीर को गंभीर चोटें आई थी, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।