हिसार। विश्व कविता दिवस की संध्या पर सोमवार को अमर उजाला कार्यालय में अपराजिता के तहत काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कवयित्री रश्मि बजाज ने सुनाया कि जीवन मेरा बन गया कविता, जीवन में तुम आए, छंद छंद आनंद-आनंद, शब्द मेरे मुस्काए। उनके साथ भिवानी से आईं डॉ. अपर्णा बतरा ने डॉ. रश्मि कबीरन की काव्य यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी स्त्रीवादी कविताएं जन-जन को झकझोरने वाली हैं। अपने कहत कबीरन काव्य संग्रह से रश्मि बजाज ने चुनिंदा कविताओं का पाठ भी किया।
इस गोष्ठी में 18 कवि व कलाकारों ने हिस्सा लिया। करीब दो घंटे तक चली काव्य गोष्ठी में कविताओं पर खूब तालियां गूंजती रहीं। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्यकार कमलेश भारतीय ने की। कवयित्री विभा ने सरस्वती वंदना से काव्य यात्रा शुरू की। कवयित्री कल्पना रहेजा ने एक प्यार का नगमा है मौजों की रवानी है गीत प्रस्तुत किया। डॉ. ईशा खन्ना ने आज जाने की जिद न करो गजल से माहौल को संगीतमय बना दिया। त्रिभुवन बख्शी व नवीन निषाद ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से शाम को यादगार बना दिया। पर्वतारोही मनीषा पायल, गुजवि से रश्मि, लक्ष्य बतरा, उर्मी मोर व बबिता गौड़ की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। जीजेयू के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुशील ने भी मधुर सुर में गीत प्रस्तुत कर समा बांध दिया। आकाशवाणी के पूर्व प्रभारी विनोद मेहता ने प्रसिद्ध शायर राजेश रेड्डी की शानदार गजलों से श्रोताओं को सराबोर किया।
मैं मात्र देह नहीं हूं, इस देह से इतर मुझमें
अंतर्मन व मस्तिष्क भी है
जिस दिन तुम मुझे चाहोगे उस दिन...
मेरी तर्कशीलता, हाजिर जवाबी और
स्वाभिमान नहीं आहत करेगा तुम्हारा अहम
- सविता रतिवाल, कवयित्री
ना बाबूजी का कंधा अब है
ना मां का वो आंचल अब है
बीता मौसम, बीती बातें
काश मुझको फिर से मिल जाता
- अर्चना ठकराल, कवयित्री
लड़कों की रीढ़ की हड्डी वो तुम्हारी पीठ में भी है
वो अकड़ती क्यों नहीं
- नवीन निषाद, कलाकार
अशआर में कितना वजन कुछ नहीं पता
अहसास मधुमक्खी या चुभन कुछ नहीं पता
- कंचन सहगल ‘किरण’, कवयित्री
कहीं एक रहती थी
आवारा सी लड़की
किसी की न सुनती
किसी की न मानती
बस अपने ही दिल की सुनती
क्या कहीं रहती है कोई ऐसी लड़की
- कमलेश भारतीय, साहित्यकार
किसी औरत या बच्चे सा मुझे होने नहीं देता
मेरा ये आदमी होना मुझे रोने नहीं देता
-प्रो. तिलक सेठी, जीजेयू
मेरी आंखों में फैली तन्हाई
मेरे चेहरे पर बैठी रुसवाई
यही पूछते हैं मुझसे वो अल्हड़
वो चंचल लड़की मैं कहां छोड़ आई
- पूनम जांगड़ा, अभिनेत्री एवं निर्देशिका
हाल मेरे देश का देखिए अखबार में
आदमी क्या बन गया
आज संसार में
- रश्मिता, युवा कवयित्री
स्वप्न से सत्य लिए
मलय से मल्हार लिए
धरती से घारा लिए
वसंत से विरह लिए
प्रेम से प्रश्न लिए
उत्सव से उत्तर लिए
कभी व्यथा कभी गाथा
नाम देता हूं कविता
- मिहिर रंजन पात्र, जीजेयू