खेती में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसको लेकर महिलाएं भी ड्रोन दीदी प्रोजेक्ट के तहत ड्रोन पायलट बनकर रोजगार प्राप्त कर सकती हैं। हिसार के टीटीसी सेंटर में महिलाओं व युवतियों को ड्रोन पायलट बनाने का कोर्स करवाया जा रहा है। इस कोर्स में 18 साल से 60 साल तक उम्र की महिलाएं हिस्सा ले सकती हैं।
महिलाएं कृषि ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग लेकर आत्म निर्भर बनेंगी
ड्रोन बनाने वाली कंपनी की ओनर राधिका गोयंका व शंकर गोयंका ने बताया कि वे ड्रोन वाव गो कृषि विमान नाम से ड्रोन बनाते हैं। सात दिन का कोर्स करवाया जाता है और 25000 रुपये फीस ली जाती है। जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से लगती है। दो दिन पहले ही पंजाब की 6 लड़कियों का एक बैच ड्रोन पायलट बनकर गया है। महिलाएं कृषि ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग लेकर आत्म निर्भर बनेंगी साथ ही सफल उद्यमी बनेंगी और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करेंगी।
उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग के दौरान महिलाओं को ड्रोन उड़ाना, रिपेयर करना, रख-रखाव आदि से लेकर ड्रोन से संबंधित अन्य सभी नियम कायदों के बारे में अवगत कराया जाता है। महिलाएं एक एकड़ में स्प्रे करने के लिए करीब 500 रुपये लिए जा रहे हैं। एक बार में ड्रोन 10 लीटर लिक्विड लेकर उड़ सकता है और एक एकड़ में करीब 5-6 मिनट में छिड़काव कर सकता है।
ड्रोन दीदी प्रोजेक्ट के तहत टीटीसी के पहले बैच में ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण लेने वाली अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही मीनू ने बताया कि ड्रोन पायलट बनकर वह अन्य महिलाओं को जागरूक करेगी, जिससे महिलाएं भी पुरुष किसानों के साथ खेती में अच्छे से उनका सहयोग कर सकें। किसान परिवार से संबंध रखने के कारण उसने ड्रोन चलाना सीखा था। महिलाएं इसे अपनाकर अपना व्यवसाय भी शुरू कर सकती हैं। प्रशिक्षण के बाद से अब मीनू खुद महिलाओं को ट्रेनिंग देंगी।