हिसार। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से जारी बजट किसी को खुश करने वाला साबित नहीं हुआ। हर किसी को कहीं न कहीं निराशा ही सहनी पड़ी। शिक्षा ,रोजगार को लेकर कोई बड़ा एलान नहीं हुआ। जिस कारण युवा वर्ग मायूस है। किसान, व्यापारी, युवा, गृहिणी, उद्यमी हर वर्ग कहीं न कहीं उपेक्षित नजर आया। महंगाई को कम करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया, जिससे गृहिणी नाराज दिखी। मंगलवार को आम बजट जारी होने पर अमर उजाला कार्यालय में शहरवासियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी।
व्यापारी वर्ग के लिए इस बजट में कोई उम्मीद नहीं मिली। हर एक व्यापारी अपने हेल्थ बीमा पर 40 हजार रुपये खर्च नहीं कर सकता। उसे टैक्स के बदले यह सुविधा तो मिलनी चाहिए। जीएसटी तो कम नहीं किया ऐसे में कपड़ा कैसे सस्ता होगा। ऑनलाइन मार्केट ने व्यापारियों के सामने पहले ही बड़ी चुनौती खड़ी की हुई है। किसी तरह की टैक्स छूट नहीं मिली। - सुरेंद्र बजाज, महासचिव, राजगुरु मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन
हेल्थ को लेकर काफी काम किए जाने की जरूरत थी। हर एक जरूरतमंद का आयुष्मान कार्ड होना चाहिए। जिससे लोगों को अपने स्वास्थ्य पर कम खर्च करना पड़े। इसके अलावा हर परिवार को एक क्रेडिट कार्ड देना चाहिए। जिस पर जो व्यक्ति जितना पैसा ले उस पर कुछ ब्याज लिया जा सकता है। - अक्षय मलिक, संरक्षक, राजगुरु मार्केट आर्गेनाइजेशन
सपने दिखाने के अलावा कुछ नहीं किया जा रहा। कोरोना के समय 1 लाख 20 हजार करोड़ के पैकेज का एलान किया गया था। वह कहां गया किसे उसका फायदा मिला। किसानों की कितनी फसल एमएसपी पर खरीदी। किसानों को डीजल पर सब्सिडी देनी चाहिए। 40 रुपये वाला डीजल किसानों को टैक्स लगाकर 87 रुपये बेच रहे हैं। किसान कहां से खेती कर लेगा। पहले हर साल 2 करोड़ नौकरी का वादा किया था। अब 60 लाख 5 साल में देने का जुमला छोड़ दिया। - मनोज टांक, युवा किसान
घरेलू महिलाओं के लिए यह बजट पूरी तरह निराशाजनक था। दूध, सरसों का तेल, दाल, राशन किसी में राहत देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। महंगाई का तड़का हर महीने लग रहा है। पेट्रोल-डीजल के रेट कम नहीं किए जा रहे। कारपोरेट टैक्स कम करने की बजाए आम आदमी को मदद देनी चाहिए थी। सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार करना चाहिए। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ाने की अनिवार्यता होनी चाहिए। - डिंपल, गृहिणी व सामाजिक कार्यकर्ता
कोरोना के नाम पर विद्यार्थियों के दो साल बर्बाद कर दिए गए। शिक्षा के लिए इस बजट में कुछ नहीं किया गया। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की हालत में सुधार करना चाहिए। विद्यार्थियों को योग और स्पोर्ट्स के क्षेत्र में बढ़ाने के लिए प्रयास होने चाहिए थे। लॉकडाउन के नाम पर स्कूल बंद करने की बजाए विकल्प पर काम करना चाहिए था। कोरोना की मार सह रहे लोगों को बजट में कोई राहत नहीं मिली। - प्रो. डॉ. आस्था, कामकाजी महिला
इस बजट ने युवा वर्ग को पूरी तरह से निराश किया। खेलों, शिक्षा, रोजगार के क्षेत्र में अनदेखी की गई। हकीकत में तो किसी भी वर्ग के लिए कुछ नहीं किया गया। युवाओं को इस समय रोजगार की सबसे अधिक जरूरत है। रोजगार सृजन के लिए कुछ प्रयास नहीं किए गए। बड़े औद्योगिक घरानों को ही कारपोरेट टैक्स में छूट दी गई।
- विकास कुमार, युवा
किसानों के लिए सरकार ने कोई एलान नहीं किया। आर्गेनिक खेती के लिए पहले भी एलान होते रहे हैं। जमीन पर अब तक लागू नहीं किए गए। एमएसपी किसानों की सबसे बड़ी मांग थी। जिस पर सरकार ने कोई रणनीति नहीं बनाई। खरीद के नाम पर किसानों को भावांतर योजना के तहत बेवकूफ बना दिया जाएगा। रसोई गैस सब्सिडी की तरह इसे बंद कर दिया जाएगा। - निहाल सिंह, किसान
यह नार्मल बजट रहा। एमएसमएई के लिए 25 हजार करोड़ का एलान किया गया है। इससे कुछ हद तक राहत मिल सकती है। योजनाओं को अच्छी तरह से लागू करना चाहिए जिससे उनका लाभ मिल सके। सोलर के लिए आवेदन करने का पोर्टल चंद मिनटों में ही बंद हो जाता है। एमएसएई को क्रेडिट लिंक योजना का फायदा लेने के लिए एक प्रतिशत अधिक ब्याज देना पड़ता है। - देवेंद्र जैन, प्रधान, हिसार उद्योग संघ