यूक्रेन में रोमानिया बॉर्डर लिए रवाना हुए भारतीय छात्र। यूक्रेन में मेड्रो स्टेशन के अंदर बंकर में बैठे भारतीय विद्यार्थी।
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हरियाणा के हिसार के कैमरी रोड स्थित पालिका विहार निवासी अमरदीप बस में सवार होकर यूक्रेन के ओडेसा शहर से रोमानिया बोर्डर के लिए निकल चुका है। 900 किलोमीटर का सफर तय करके अमरदीप रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचेगा। स्पेशल की किराए पर की गई इस बस में भारत के 50 विद्यार्थी शामिल हैं। जिनमें हिसार का अमरदीप है। अमरदीप के पिता के हेल्थ इंस्पैक्टर सत्यवान ने बताया कि अमरदीप से भारतीय मुद्रा के हिसाब से 7 हजार रुपये किराया लिया गया है।
बस चालक रोमानिया बॉर्डर से तीन किलोमीटर दूर उतारेगा। इसके बाद उन्हें तीन किलोमीटर पैदल चलकर रोमानिया बॉर्डर पर जाना होगा। बॉर्डर पर अपनी पहचान बताकर वे रोमानिया में प्रवेश कर पाएंगे। सत्यवान ने बताया कि अमरदीप व उसके दोस्तों का राशन भी खत्म हो गया है।
तीन दिनों से बिस्कुट के सहारे गुजारा कर रहे हैं। अमरदीप यूक्रेन के ओडेसा शहर में नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। अब युद्घ के चलते अमरदीप यूक्रेन में फंस गया है।
पॉलेंड बॉर्डर में एंट्री के लिए मांगे 200 डॉलर
बरवाला तहसील के नया गांव निवासी कुलदीप दो दिन पहले यूक्रेन से हिसार पहुंचे हैं। कुलदीप ने बताया कि यूक्रेन में अब निरंतर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कुलदीप ने बताया उसके हरियाणा के करीब 20 दोस्त यूक्रेन में फस गए हैं। शनिवार को उसके दोस्त किराये की टैक्सी लेकर यूक्रेन देश छोड़ने के लिए पोलेंड बॉर्डर पर पहुंचे तो पोलेंड बॉर्डर में प्रवेश करने के लिए उनके उनसे 200 डॉलर की डिमांड की गई है। यानी भारतीय मुद्रा के अनुसार 14 हजार रुपये मांगे हैं। कुलदीप ने भारत सरकार से मांग की है कि पोलेंड सरकार से बातचीत करके इसका समाधान करवाया जाए। कुलदीप ने बताया कि पोलेंड बॉर्डर पर जिन छात्रों से 200 डॉलर मांगे हैं उनमें कैथल व पलवल के छात्र भी शामिल हैं। अब न तो वे आगे जा सकते हैं व न ही वापस यूक्रेन जा सकते हैं।
सूखे चावल खा कर गुजारा कर रहे हैं हिसार के छात्र
यूक्रेन के खारकीव शहर में स्थित अपने छात्रावास के बंकर में बैठे हिसार के बरवाला शहर निवासी छात्र सागर ने बताया कि हॉस्टल की तरफ से अब खाना मिलना तक बंद होने वाला है। रोटी सब्जी बननी बंद हो गई हैं। हॉस्टल में हरियाणा के 25 छात्र रह रहे हैं। जो हरियाणा के अलग-अलग जिलों के हैं। सागर ने बताया कि अब हमें चावल खाकर गुजारा करना पड़ रहा है। क्योंकि हॉस्टल के बाहर जाने की किसी को भी अनुमति नहीं है। हॉस्टल में अब चावल भी सीमित मात्रा में खाने को मिलने लगे हैं ताकि ज्यादा दिन तक गुजारा हो सके। अगर यही हाल रहा तो छात्र भूख के मारे दम तोड़ सकते हैं। बाजार में दुकानों पर राशन नहीं मिल रहा है। सभी दुकानें, बाजार व सुपर मार्केट बंद हो गए हैं। हमारा हॉस्टल रसिया बॉर्डर से महज 45 किलोमीटर दूर है। इस कारण यहां पर सबसे ज्यादा खतरा हमारे ऊपर मंडरा रहा है।