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भावी पीढ़ी को गुरु की शिक्षा मिले, इसलिए गुरुबाणी, गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का करें प्रचार

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भावी पीढ़ी को गुरु की शिक्षा मिले, इसलिए गुरुबाणी, गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का करें प्रचार: सीएम
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हांसी में बाबा बंदा सिंह बहादुर की स्मृति में आयोजित वार्षिक दीवान में टेका माथा
- बोले : इस प्रकार के समागम समाज में एक नई ऊर्जा, ताकत और सुरक्षा की भावना का करते हैं संचार
- जहां गुरुद्वारे नहीं हैं, वहां गुरुद्वारे बनवाने का प्रयास करें और इस कार्य में राज्य सरकार की ओर से भी पूरी मदद की जाएगी
फोटो- 285, 287
संवाद न्यूज एजेंसी
हांसी (हिसार)। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए मुगलों के खिलाफ लड़ाइयां लड़कर देश में गुलामी को खत्म करके आजादी का परचम लहराने में योगदान दिया। ऐसे संत व सिपाही की याद में इस प्रकार के समागम निरंतर होते रहने चाहिए, जिससे न केवल आने वाली पीढ़ी को महापुरुषों की जीवनी से प्रेरणा मिलती है, बल्कि इससे समाज में एक नई ऊर्जा, ताकत और सामाजिक सुरक्षा की भावना का संचार भी होता है। भावी पीढ़ी को गुरु की शिक्षा मिले, इसलिए गुरुबाणी, गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का प्रचार करें।
यह बात मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रविवार को हांसी में बाबा बंदा सिंह बहादुर की स्मृति में आयोजित 76वें वार्षिक दीवान के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि माथा टेकने के बाद दीवान में प्रदेश भर से आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी उन्हें मौका मिलता है वे इस प्रकार के समागम में अवश्य पहुंचते हैं। बाबा बंदा सिंह बहादुर की जीवनी को हम पढ़ते हैं या नाटक में देखते हैं, भजन सुनते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने गुरु पुत्रों की शहादत का बदला भी लिया और अपनी शहादत भी दी। यहां तक की अपने पुत्र का भी उन्होंने बलिदान दिया। यह वास्तव में प्रेरणादायक है। गुरु नानक देव जी ने बाबा बंदा सिंह बहादुर को प्रेरणा दी कि संत की बजाय सिपाही की तरह कार्य करो। बाबा बंदा सिंह बहादुर समाज के लिए तो संत थे, लेकिन समाज के दुश्मनों के लिए एक सिपाही थे। उन्होंने हथियार उठाए, देश की रक्षा की और सबसे पहले सिख राज्य की स्थापना करके लोहगढ़ में राजधानी बनाई। समाज की भलाई के लिए उन्होंने अनेक काम किए।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर की स्मृति में सोसायटी बनी हुई है, यह लगातार अपना कार्य कर रही है। आने वाली पीढ़ी को गुरु की शिक्षा मिले, इसलिए गुरुबाणी, गुरू ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का अधिक से अधिक प्रचार करें। इसके लिए जहां गुरुद्वारे नहीं है, वहां गुरुद्वारे बनवाने का प्रयास करें और इस कार्य में राज्य सरकार की ओर से भी पूरी मदद की जाएगी। इसके साथ ही बाबा बंदा सिंह बहादुर की जीवनी के बारे में भी नई पीढ़ी को सिखाने के लिए उनके जीवन पर किताबें तैयार करने, कला, गीत, भजन व सेमिनार का भी आयोजन किया जाए।
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इन्होंने भी किया संबोधित
राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा, हांसी के विधायक विनोद भयाना, बाबा बंदा सिंह बहादुर के वंशज जतिंद्र पाल सिंह सोढी, लोकसभा सांसद संजय भाटिया, सांसद बृजेंद्र सिंह, जींद के विधायक कृष्ण मिढ्ढा आदि ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
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