हिसार। कोविड ने रंगमंच की दुनिया में ऐसी उथल-पुथल मचाकर रख दी कि युवा पीढ़ी की इसके प्रति सोच ही बदल गई। कोविड से पहले कलाकार अपने जुनून व लक्ष्य तय कर रंगमंच की दुनिया में कदम रखते थे। इस महामारी के बाद रंगमंच को युवा पीढ़ी मात्र बॉलीवुड-सिनेमा-वेब सीरीज व हरियाणवी-पंजाबी फिल्मों की दुनिया में एंट्री करने का माध्यम मानती है।
ये कहना है रंगकर्मी लोकेश मोहन खट्टर व बलजिंद्र कौर का। रंगकर्मियों ने बताया कि युवा पीढ़ी भूल जाती है कि रंगमंच के माध्यम से ही उनको चकाचौंध की दुनिया में एंट्री करने का अवसर मिला। अच्छी बात है कि ऐसे अवसर कलाकारों को मिलते रहें लेकिन रंगमंच को कभी न भूलें।
अपनी दिनचर्या में थोड़ा सा समय रंगमंच के लिए भी निकालते रहें। तभी आपकी प्रतिभा में निखार बना रहेगा। रंगकर्मियों ने बताया कि अगर सरकार भी कलाकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पेंशन-प्रोत्साहन राशि लागू करने की कोई पॉलिसी बनाती है तो निश्चित रूप से रंगमंच का भविष्य उज्ज्वल है।