नारनौंद। गांव गुराना में जुलाई में हुई बारिश से जलभराव के कारण सैंकड़ों एकड़ धान व अन्य फसलें खराब हो गई थी, मगर वहां पर अब भी हजारों एकड़ जमीन पर बारिश का पानी जमा है और करीब 800 एकड़ भूमि में गेहूं की बिजाई तक नहीं हो सकी। इससे किसान परेशान हैं और वह पिछले एक साल से दर्द झेल रहे हैं। अभी तक किसानों को न तो उनकी धान व अन्य खराब फसलों का मुआवजा मिला है और न ही उनके खेतों में गेहूं की फसल की बिजाई हो पाई है। अब भी करीब एक हजार एकड़ जमीन पर दो फुट तक पानी जमा है।
किसान ऋषि नंबरदार, सुरेश कुमार, कृष्ण कुमार, धर्मवीर, राजबीर, सुखबीर, चांदीराम, बजे सिंह, प्रेम सिंह, सतबीर सिंह, सुभाष, हरिकेश, सूबे सिंह, नरेश कुमार, बिल्लू, रामनिवास व बलवान ने बताया कि जुलाई में हुई भारी बारिश के कारण आसपास के कई गांव का पानी गुराना में एकत्रित हो गया था। उन्होंने काफी बार प्रशासन से पानी निकालने की गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन ने किसानों की समस्या की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। इससे उनकी धान व अन्य फसल पानी में डूब कर बर्बाद हो गई थी। सरकार के आदेश पर गिरदावरी भी करवाई गई थी, लेकिन अभी तक किसानों को उनकी खराब फसलों का मुआवजा नहीं मिला है। वहीं अब जनवरी में हुई बारिश ने फिर किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया और अब करीब 700 एकड़ गेहूं की फसल भी बारिश के कारण बर्बाद हो गई, जिस कारण किसानों को खाने के लाले पड़ गए हैं। प्रशासन से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुध नहीं ली जा रही है। किसानों ने सरकार व प्रशासन से जल्द से जल्द मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वह अपने रोजमर्रा के खर्चों को वहन कर सकें।
जनवरी में हुई बारिश से गांव गुराना में करीब 700 एकड़ गेहूं की फसल खराब हो गई है, जिसकी हमने रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी है। पिछली फसल में भी गांव में बारिश का पानी जमा होने की वजह से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। उसका मुआवजा जल्द से जल्द किसानों को दिलवाया जाएगा। जिसकी गिरदावरी पूरी करवाकर भेजी जा चुकी है। - ईश्वर सिंह, कृषि अधिकारी हांसी