क्अजय सिंह बिष्ट
हिसार। केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान द्वारा क्लोनिंग के जरिये तैयार किये जा रहे कटड़ों का प्रोजेक्ट अब दूसरे चरण में पहुंच गया है। पहला चरण पूरा होने के बाद दूसरे चरण के लिये केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान को नेशनल एग्रीकल्चर साइंस फंड द्वारा 827 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। दूसरे चरण में इस राशि से क्लोन झोटों की संख्या और सीमन की यूनिट बढ़ाई जाएगी। संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. प्रेम सिंह यादव ने बताया कि एक झोटे से एक लाख सीमन की डोज तैयार किए जाने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के दौरान सभी क्लोन झोटों के सीमन पर विस्तारित शोध किया जायेगा, जिसमें सीमन के सभी मापदंडों पर प्लासाइटोमीटरी व कंप्यूटर अस्सिटिड सीमन एनालाइजर जैसी उच्च तकनीकी मशीनों की सहायता से डेटा इकट्ठा किया जाएगा। सभी मापदंडों पर खरा उतरने वाले झोटों के सीमन को ही कृत्रिम गर्भाधान के उपयोग में लाया जाएगा। जिसके जरिये उत्तम नस्ल के झोटे तैयार किये जाएंगे। संवाद
एक झोटे से तैयार होगी एक लाख डोज
बता दें कि क्लोनिंग प्रक्रिया में तैयार झोटे सर्वश्रेष्ठ झोटों की कोशिका से तैयार किए जाते हैं। इनमें उत्तम नस्ल के झोटों के सभी आनुवांशिक गुण होते हैं। क्लोनिंग प्रक्रिया से तैयार हुए एक झोटे से करीबन एक लाख सीमन डोज तैयार की जा सकती है, जिसका मतलब एक लाख उत्तम नस्ल के कटड़े सिर्फ एक ही झोटे के सीमन से तैयार होंगे। फिलहाल संस्थान में क्लोन झोटों का 25 हजार यूनिट सीमन मौजूद हैं।
फीमेल क्लोनिंग की भी की जा रही तैयारियां -
संस्थान में कार्यरत एवं क्लोनिंग प्रोजेक्ट में सहायक डॉ. मित्ती पुनिथा ने बताया कि क्लोनिंग प्रक्रिया के जरिए तैयार क्लोन झोटों के अभी तक के परिणाम काफी अच्छे हैं। इसके चलते अब कटड़ी भी तैयार की जाने की योजना बनाई जा रही है। इसके मापदंडों पर अभी कार्य किया जा रहा है। इसके लिये उपयोग में आने वाली कोशिकाओं को इकट्ठा किया हुआ है। प्रोजेक्ट में प्रयोग में लाई जाने वाली कोशिका क्लोन झोटों की पूंछ से प्राप्त की गई है। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस प्रोजेक्ट को लैब से जमीन पर लाने का कार्य किया जाएगा।
अभी तक तैयार हुए हैं इतने झोटे
क्लोनिंग प्रक्रिया के तहत अभी तक 7 झोटों को तैयार किया जा चुका है। भविष्य में इनके सीमन की डोज के जरिए कृत्रिम गर्भाधान करवाकर उत्तम नस्ल के कटड़े-कटड़ियां तैयार की जानी हैं।
क्लोनिंग प्रोजेक्ट के फायदे -
- पशु की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
- पशु की कार्यक्षमता ज्यादा होगी।
- भैंसों में दुग्ध उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी।
- पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता में होगा इजाफा।
वर्जन...
दूसरे चरण में क्लोनिंग प्रक्रिया के तहत कृत्रिम गर्भाधान से सबसे अच्छी नस्ल के कटड़े व कटड़ियां तैयार किये जाएंगे। जिसका सीधा फायदा पशुपालकों को होगा। क्लोन झोटों के सीमन की डोज उचित दामों पर जल्द ही पशुपालकों को भी उपलब्ध करवा दी जाएगी।
- डॉ. प्रेम सिंह यादव, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, क्लोनिंग प्रोजेक्ट, केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान।
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पहले क्लोन झोटे से तैयार हुए हैं 70-80 बच्चे
हिसार गौरव क्लोनिंग प्रोजेक्ट द्वारा तैयार हुआ मुर्राह नस्ल का पहला झोटा है। इसका जन्म 2015 में इसी प्रोजेक्ट के तहत हुआ था। आज इसकी उम्र 6 साल के लगभग हो गई है। इसमें एक स्वस्थ झोटे के सारे गुण हैं। इसके सीमन से 6 साल में लगभग 70-80 कटड़े व कटड़ियां तैयार की जा चुकी हैं। सभी बच्चे कृत्रिम गर्भाधान से ही हुए हैं। हिसार गौरव से तैयार कटड़ों से भी सीमन लिया जाने लगा है।