खिलाड़ी अंतिम के हारने के बाद रोती उसकी मां।
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दोपहर बाद साढ़े तीन बजे पहलवान अंतिम का मैच शुरू हुआ। बरामदे में पिता रामनिवास, माता कृष्णा देवी, बहन मीनू, चाचा संजय, दादी गुड्डी मैच देख रहे थे। वहीं, भाई अर्पित बरामदे के बाहर सीढ़ियों के पास बैठकर मोबाइल में मैच देख रहा था। जैसे ही अंतिम हार गई तो मां उठकर बेटे के पास चली गई।
उसके बाद कमरे में जाकर जोर-जोर से रोने लगी। हार के बाद परिवार के सदस्यों में मायूसी छा गई। हर कोई बेटी की हार से दुखी था। वहीं, मैच से पहले मां कृष्णा देवी ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर जीत की कामना की।
हार का बहुत दुख, साढ़े सात साल से बेटी कर रही मेहनत
पिता रामनिवास ने हार के बाद कहा कि बेटी साढ़े सात साल से मेहनत कर रही है। हार का बहुत दुख है। आज कहने के लिए कुछ नहीं बचा है। इस बात की तसल्ली है कि वह 19 साल की है। वहीं, पिता रामनिवास ने कहा कि हार-जीत तो होती रहती है। ओलंपिक तक पहुंचना ही बहुत बड़ी बात है। वहीं, तुर्कीये की पहलवान जेनेप येटगिल ने पूरे मैच में दबाव बनाए रखा।
साई में एलईडी पर खिलाड़ियों व कोच ने देखा मैच, हार के बाद छाई मायूसी
साई के कार्यालय के पास एलईडी पर खिलाड़ियों से लेकर कोच ने पहलवान अंतिम पंघाल का मैच देखा। अंतिम का मैच देखने के लिए खिलाड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। मगर हार के बाद सभी के चेहरे मायूस हो गए। साई से कुश्ती कोच राजेश नांदल ने कहा कि ओलंपिक को लेकर उसकी तैयारी पूरी थी। मगर वह कैसे हार गई, यह तो वहीं बता सकती है।