हिसार। बस स्टैंड पर कैंटीन के बाहर सामान रखने को लेकर विवाद अब भी सुलझा नहीं है, लेकिन रोडवेज विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए अधिकृत कैंटीन संचालकों और हॉकर के लिए पहचान पत्र जारी करने के आदेश दिए हैं। अब बिना पहचान पत्र के कोई हॉकर बस स्टैंड पर सामान नहीं बेच सकेगा। इसके लिए हॉकर को अपनी कैंटीन संचालक के माध्यम से विभाग से पहचान पत्र बनवाना होगा। इसके लिए हॉकर को बस एसएस कार्यालय में अपना आईडी प्रूफ जमा करना होगा, और उसके बाद ही पहचान पत्र जारी किए जाएंगे।
बस स्टैंड पर तीन साल के लिए कैंटीन का टेंडर दिया जाता है। कुल 11 कैंटीनों में से 6 बस स्टैंड के अंदर और 5 परिसर से बाहर स्थित हैं। हाल ही में इन कैंटीनों के बाहर सामान रखने और अवैध हॉकर के बारे में विवाद उत्पन्न हुआ था। एसएस रघुवीर सिंह और कैंटीन संचालकों के बीच यह विवाद बढ़ते हुए थाने तक पहुंच गया था, जिसमें एसएस ने कैंटीन संचालक के खिलाफ अभद्र व्यवहार और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत तक की थी।
जीएम को की गई थी शिकायत
एसएस रघुवीर सिंह ने इस विवाद को लेकर जीएम से भी शिकायत की थी और विभागीय कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन जीएम ने अब तक इस मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया है। इस विवाद के बाद अब केवल एक नई पहल की गई है। हॉकर के पहचान पत्र बनवाए जा रहे हैं। इससे पहले बिना किसी पहचान पत्र और नियमों के हॉकर सामान बेच रहे थे, लेकिन अब केवल अधिकृत हॉकर ही बस स्टैंड पर सामान बेच सकेंगे।
दो धड़ों में बंटे कैंटीन संचालक
कैंटीन संचालक भी दो धड़ों में बंटे हुए हैं। एक पक्ष ने दूसरे पर अतिक्रमण का आरोप लगाया है, जबकि दूसरा पक्ष इसका विरोध कर रहा है। रोडवेज विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण मामला अभी भी उलझा हुआ है।
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सभी हॉकर के नए पहचान पत्र बनाए जा रहे हैं। इसके लिए उनकी आईडी मांगी गई है। आईडी प्रूफ देने के बाद पहचान पत्र बना कर जारी किए जाएंगे। - रघुवीर सिंह, एसएस, बस स्टैंड हिसार।