हिसार। एचएयू के कृषि मेले में सुबह से ही किसानों का आना शुरू हो गया था। शाम 6 बजे तक 28 हजार किसान मेले में पहुंचे। इनमें से 30 प्रतिशत महिलाएं थीं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, ऐसा पहली बार है जब कृषि मेले में 30 प्रतिशत से अधिक महिलाएं पहुंची। मेले में एचएयू, लुवास, एमएचएयू करनाल व बाहरी कंपनियों की ओर से सैकड़ों स्टाल लगाई गई, जिसमें विभिन्न फसलों की उन्नत किस्मों, आधुनिक तकनीकों सहित आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी किसानों को दी गई।
मैं छोरा हरियाणे का ....पर झूमे किसान
कृषि मेले में किसानों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। इस दौरान मैं छोरा हरियाणे का.... सहित विभिन्न गीतों पर कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुति दी। किसानों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का जमकर लुत्फ उठाया।
75 सरकारी स्टॉल लगीं, 1250 किसानों ने करवाई मिट्टी जांच
मेले में 75 सरकारी, 110 प्राइवेट, 15 प्रगतिशील किसान व सेल्फ हेल्प ग्रुप, 5 बैंक की स्टॉल लगाई गईं। इस दौरान किसानों को विवि के फार्म का भी भ्रमण करवाया गया। इसके लिए विवि की बस लगाई गई थी। वहीं, मेले में 1250 किसानों ने मिट्टी और पानी जांच के 930 सैंपल की जांच करवाई।
विजेता बोले : इस कागज का के अचार घालां, कोय छोटा-मोटा सामान दे देते
हिसार। मेले में विभिन्न फसलों की हुई प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रामनिवास व अन्य अधिकारियों ने किसानों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। इस पर कुछ किसानों ने आपत्ति जताई और कहा कि प्रमाण पत्र के साथ कोई छोटा-मोटा उपकरण दिया जाना चाहिए था। पानीपत से आए किसान रामप्रकाश ने सम्मानित होने के बाद अधिकारियों से कहा कि इस कागज का के अचार घालां, कोय छोटा-मोटा सामान दे देते, कोई खेती का उपकरण दे देते, ताकि खेती में फायदा होता। पानीपत से यहां आन का कै फायदा होया। इस दौरान अलग-अलग श्रेणी में कुल 16 विजेता किसानों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा कार्यक्रम में प्रत्येक जिले के एक प्रगतिशील किसान को भी सम्मानित किया गया।
किसान बोले- फल बेचते नहीं, लोगों के खाने के लिए निशुल्क
किसान रामप्रकाश ने फलदार पौधों की श्रेणी में मौसमी के अच्छे फल के चलते प्रथम स्थान हासिल किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने डेढ़ बीघा में मौसमी सहित फलदार पौधे लगाए हैं। वे फलों की बिक्री नहीं करते। बल्कि गांव के आसपास के लोग वहां आकर निशुल्क फल खाते हैं। उन्होंने कहा कि वे फलदार पौधों की प्राकृतिक खेती करते हैं।
कृषि मेले का दृश्य। - फोटो : Hisar
कृषि मेले में लगी स्टॉल पर जानकारी लेते किसान।- फोटो : Hisar