हिसार। कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान के करीब 4500 सैनिकों को मार गिराया था। पाकिस्तान ने 1500 सैनिकों की मौत को स्वीकार किया था। विकट परिस्थितियों में लड़ते हुए 543 भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। यह युद्ध भारतीय सेना के अदम्य साहस की गाथा है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद लड़ा गया यह सबसे बड़ा युद्ध था। 62 दिन चले इस युद्ध में सैनिकों ने दो से तीन दिन भूखे प्यासे रहकर लड़ाई लड़ी। यह युद्ध दुश्मनों की लाशों को ढाल बनाकर लड़ा गया। यह कहना है हमारे पूर्व सैनिकों का। वे मंगलवार को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में अदम्य साहस दिखाकर दुश्मन को पराजित करने वाले 7 सैनिकों को परमवीर चक्र, 11 को महाबीर चक्र व 7 को वीर चक्र प्रदान किया गया। परमवीर चक्र से नवाजे गए योगेंद्र यादव व संजय सिंह जाट अब भी जिंदा हैं।
कारगिल का युद्ध भारतीय सेना की सर्वोच्च साहस की कहानी है। सैनिक संगठन हर साल कारगिल के सैनिकों को सम्मानित करते हैं। कारगिल युद्ध की वीरांगनाओं को नमन है। - वेटरन ओमप्रकाश
पाकिस्तानी सेना के पहाड़ी पर मौजूद होने के कारण हमारे सैनिक सीधे निशाने पर आ रहे थे। साहस और वीरता का परिचय देते हुए सैनिकों ने पाकिस्तान का मुकाबला किया। माइनस 45 डिग्री में दुश्मन को परास्त करने में विजयी रहे। वेटरन कृष्ण कुमार
कारगिल युद्ध भारतीय सेना की पीठ में छुरा घोंपने की तरह था। पाकिस्तान ने समझौते को तोड़कर धोखा किया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के मुकाबले करीब दस प्रतिशत शहादत देकर युद्ध जीता। दुश्मन को हमसे दस गुना नुकसान हुआ। - वेटरन दरियाव सिंह
सैनिक संगठन समय समय पर कारगिल युद्ध के शहीदों व सैनिकों के दुख-सुख में हिस्सा लेता है। उनके नाम पर पार्क, स्कूल का नाम, शहीद की प्रतिमा लगवाने का काम कर रहा है। हिसार जिले में अब तक कुल 43 लोग शहीद हो चुके हैं। - वेटरन सूरजमल
शहीदों, शहीद परिवारों, पूर्व सैनिकों का सम्मान प्रशासन, सरकार व हर नागरिक को करना चाहिए। अपनी जान देश के लिए कुर्बान करने वालों के लिए जितना भी सम्मान दिया जाए वह कम है। शहीदों के गांव में उनकी प्रतिमा होनी चाहिए। - वेटरन श्रवण सिंह
पाकिस्तानी सैनिकों की लाशों को ढाल बनाकर हमारे सैनिक लड़े। अपने हाथ पैर गंवाने के बाद भी सैनिक युद्ध मैदान में डटे रहे। भारत को सभी युद्धों में सबसे बड़ा नुकसान इस युद्ध में हुआ था। 25 जुलाई की रात को पाकिस्तानी सेना मोर्चे छोड़कर भाग गई थी। 26 जुलाई को भारतीय सेना ने सभी चोटियों पर तिरंगा लहराकर फतह का एलान किया था। - चरण सिंह मलिक, प्रदेशाध्यक्ष इंडियन वेटरन आर्गेनाइजेशन
अग्निवीर योजना को लेकर 18 बिंदुओं पर विरोध
इंडियन वेटरन आर्गेनाइजेशन के प्रदेशाध्यक्ष चरण सिंह मलिक ने अग्निवीर को लेकर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि हमने 18 बिंदुओं पर अपनी आपत्ति जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को अपना पत्र भेजा हुआ है। चार साल की योजना लागू होने के बाद सेना में भाई भतीजावाद, भ्रष्टाचार बढ़ेगा। पांच साल में सैनिक राइफल उठाने लायक नहीं हो पाते चार साल में पूरी तरह प्रशिक्षित कैसे हो जाएंगे। चार साल में ट्रेनिंग, छुट्टी लेने के बाद कैसे डिग्री पूरी कर पाएंगे, कैसे वह ट्रेंड हो सकेंगे। जिन लोगों को 15 साल के लिए रखा जाएगा उनकी चार साल की सेवा उसमें नहीं जोड़ी जाएगी। 15 साल वाले सैनिकों को भी पेंशन नहीं मिल पाएगी। इस योजना को लेकर हम जिन देशों से तुलना कर रहे हैं उनकी स्थिति अलग है। यूक्रेन, इस्राइल स्थायी सेना होने के कारण ही मुकाबले में डट सके।