तजिंद्रपाल का कहना है कि 15 अगस्त पर 3 मिलीमीटर साइज का तिरंगा बनाएंगे। इसे बनाने में मात्र दो घंटे का समय लगेगा। तिरंगा का डंडा बांस की झाडू के तिनके से तैयार करेंगे। वहीं उनके द्वारा बनाई गई चीजें देखने के लिए बच्चे से लेकर बुजुर्ग घर आते हैं। हर कोई तजिंद्रपाल की कला को देखकर दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। अब तक उन्हें कई बार राज्यपाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सामाजिक संस्थाओं से सम्मान मिल चुका है। मगर आज भी उन्हें सरकार से मलाल है। उनका कहना है कि जिस तरह सरकार खिलाड़ियों पर धनवर्षा करती है, उसी प्रकार कला के क्षेत्र में नाम कमाने वाले लोगों को भी राशि देनी चाहिए।
जतिंद्रपाल का सपना था कि वह अपनी कला का प्रदर्शन कर नाम रोशन करें, जोकि उन्होंने कर दिखाया। पहले परिवार के सदस्यों का यह काम पसंद नहीं था। वह कहते थे कि क्यों आंख फोड़ रहा है। परिवार के सभी सदस्यों के सोने के बाद वह अपनी कला से चीजें बनाता था। रात को तीन बजे तक इस काम में लगा रहता था। जतिंद्रपाल ने बताया कि जब वह पांचवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब वह भाई को दुकान पर पेंटिंग बनते देखते थे। वहीं से उन्हें प्रेरणा मिली।