राजगढ़ रोड स्थित गवर्नमेंट पीजी कॉलेज में वीरवार को हुई फिजिकल काउंसिलिंग हुई। कांउसिलिंग के दौरान विद्यार्थियों और अभिभावकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे कोरोना संकट के बीच सामाजिक दूरी रखने के सभी नियम ध्वस्त हो गए। कॉलेज के सभी कोर्सों में रिक्त मात्र 226 सीटों के लिए करीब 7 हजार से अधिक विद्यार्थी व अभिभावक कॉलेज के बाहर पहुंच गए।
हालात ये हुए कि कॉलेज प्रशासन को मुख्य द्वार पर ही शिक्षकों को बैठाना पड़ा और उन्हीं विद्यार्थियों को अंदर जाने दिया गया, जिनके अंक प्रतिशत जारी की गई कटऑफ के अनुसार थे। भारी भीड़ को नियंत्रित करने में जहां कॉलेज प्रशासन के पसीने छूट गए। वहीं, राजगढ़ रोड पर भी लंबा जाम लग गया। यहां करीब 2 घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही।
दाखिले के लिए छह जिलों से आए थे विद्यार्थी
गवर्नमेंट पीजी कॉलेज प्रदेश के शीर्ष तीन बेहतरीन कॉलेजों में से एक है। उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा जारी रैंकिंग में कॉलेज को प्रदेश में तीसरा स्थान मिला था। यही कारण है कि जिले के अलावा आस-पास के जिलों के विद्यार्थी भी इस कॉलेज में दाखिले का प्रयास करते हैं। वीरवार को यहां हिसार के अलावा, फतेहाबाद, सिरसा, भिवानी, जींद और कैथल तक के विद्यार्थी दाखिले के लिए पहुंचे थे।
फेल हो गया था विभाग का दाखिलों का ऑनलाइन सिस्टम
कोरोना संकट के बीच इस भारी भीड़ का कारण उच्चतर शिक्षा विभाग रहा। विभाग ने ऑनलाइन सेंट्रलाइज्ड एडमिशन किए थे और जैसे-तैसे ऑनलाइन दो मेरिट लिस्ट जारी की थी। इस मेरिट लिस्ट के जारी होने में कई बड़ी खामियां सामने आईं और बड़ी संख्या में 90 प्रतिशत से अधिक अंकों वाले विद्यार्थी भी दाखिले से वंचित रह गए, जब विभाग से दाखिला प्रक्रिया नहीं संभली तो कॉलेजों को फिजिकल काउंसिलिंग कर दाखिले करने का काम सौंप दिया। जिसका परिणाम भारी भीड़ के रूप में सामने आया। अगर विभाग पहले ही कॉलेजों को अपने स्तर पर मेरिट बनाने का काम देता तो शायद अब तक विद्यार्थियों के दाखिले हो चुके होते।