हिसार। रंगमंच ने समाज को नई दिशा दी है। रंगमंच हमेशा से था और हमेशा रहेगा। रंगमंच के जरिये एक साथ हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच पाना मुमकिन नहीं होता क्योंकि यह कला का एक सजीव माध्यम है। इसमें दर्शक भी सजीव होते हैं और कलाकार भी। थिएयर समाज को आइना दिखाता है। थिएटर करने का लक्ष्य होना बहुत जरूरी है और थिएटर करो तो पूरी लग्न से करो। यह कहना है रंगमंच कलाकार डॉ. सतीश कश्यप व मनीष जोशी का। विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर रविवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कलाकारों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार कमलेश भारतीय द्वारा किया गया।
डॉ. सतीश कश्यप ने कहा कि एक थिएटर का कलाकार जिंदगी में आने वाली परिस्थितियों का सामना कर सकता है। थिएटर कलाकार गांव में भी रहता है, शहर में भी रहता है, देश व विदेश में भी रहता है। अगर उसमें रंगमंच का गुण है तो वह हर जगह फिट हो सकता है। रंगमंच निदेशक मनीष जोशी ने कहा कि थिएटर करने का लक्ष्य होना बहुत जरूरी है। जो थिएटर को समय नहीं देते थिएटर उनको कुछ नहीं देता। कार्यक्रम में आए सभी कलाकारों ने मनीष जोशी को दास्तान ए रोहनात नाटक करवाने पर बधाई दी। कार्यक्रम में अभिनेत्री रमन नासा, उर्मी मोर, रश्मि, सौरभ ठकराल, सरोज श्योराण, डॉ. राखी जोशी, अर्चना ठकराल, विभोर भारद्वाज, देवांश, अपूर्व भारद्वाज मौजूद रहे।
थिएटर एक इंसान को जीवन जीना सीखता है। थिएटर में किए जाने वाले अलग-अलग किरदार हमेशा ही जिंदगी में हौसला देते हैं। आज मैं जो भी जहां भी खड़ा हूं वह थिएटर व मेरे गुरुओं के आशीर्वाद से है। - डॉ. सतीश कश्यप, अभिनेता, रंगमंच कलाकार
मेरा मानना है कि थिएटर क्रिएटिव लोगों का ग्रुप है। थिएटर करने के लिए हर कलाकार को मेहनत करनी पड़ती है। मैंने दंगल जैसी बड़ी फिल्म में काम किया, लेकिन जो थिएटर से सीखने को मिलता है वह फिल्मों में सीखने को नहीं मिलता। थिएटर ने मेरी मुलाकात डॉ. सतीश कश्यप, मनीष जोशी व राखी जोशी जैसे महान कलाकारों से करवाई। - रमन नासा, अभिनेत्री
थिएटर करना मेरा बचपन का सपना था। सपना पूरा करने के लिए मैंने थिएटर को समय दिया। थिएटर मुझे इस कदर पसंद है कि मैं इसके बगैर रह नहीं सकता। मुझे लगता है कि थिएटर से बड़ा अभिनय कोई दूसरा नहीं है। थिएटर करना थोड़ा जोखिम भरा जरूर है लेकिन थिएटर के रंग हुए कलाकार हमेशा आगे बढ़ते चले जाते हैं। - मनीष जोशी, निदेशक, रंगमंच कलाकार
मेरी कविता लिखने में रुचि है। कविता का लोगों के जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है। वहीं थिएटर देखना बहुत अच्छा लगता है। थिएटर के कलाकार बहुत मेहनत करके अपना एक्ट तैयार करते हैं। लोगों के सामने जीवंत नाटक प्रस्तुत करते हैं। मेरी तरफ से सभी कलाकरों को अंतरराष्ट्रीय रंगमंच दिवस की शुभकामनाएं।
उर्मी मोर, फिजियोथैरेपिस्ट
मुझे लगता है कि थिएटर हम कलाकारों को ट्रांसफोर्मेशन सिखाता है। किसी किरदार में कैसे ढलना है, कैसे खुद को भुला कर उस किरदार की आत्मा में प्रवेश करना है यह थिएटर से बेहतर और कोई नहीं सिखा सकता। - रश्मि, जीजेयू कर्मचारी
किसी भी कलाकार को अभिनय की बारीकियां सीखनी हों या उसमें गहराई तक गोता लगाना हो तो थिएटर से बेहतर माध्यम कोई दूसरा नहीं हो सकता। थिएटर ने समाज को नई दिशा दी है। थिएटर के कलाकारों को मेरा सलाम है। - कमलेश भारतीय, साहित्यकार
यदि मेरे जीवन में थिएटर न आया होता तो मेरा कोई अस्तित्व ही नहीं होता। थिएटर देखना और उससे सीखना मेरी हमेशा रुचि रही है। जब भी मैं थिएटर मंच पर गया हूं तो बहुत कुछ नया सीखने को मिला है। सीखने के मामले में मैं कभी पीछे नहीं हटता। - सौरभ ठकराल, अभिनेता व रंगमंच कलाकार
मैं पेशे से एक शिक्षक हूं। मुझे कविता पाठ करना पसंद है, लेकिन मेरी रूचि रंगमंच में भी होने लगी है। रंगमंच ने बहुत ही उच्च कोटी के कलाकार पैदा किए हैं। रंगमंच सामाजिक मुद्दों को उजागर करने के लिए एक मंच तैयार कर रहा है जो आम जनता से संबंधित है। - सरोज श्योराण, शिक्षक
जैसे रंगों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है, ठीक उसी तरह कलाकारों व कला की क्षेत्र में रंगमंच का बहुत ही अधिक महत्व है। आम लोगों को भी रंगमंच के महत्व के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।
- डॉ. राखी जोशी, कलाकार
थिएटर तो एक कलाकार के रग-रग में बसा होना चाहिए। एक अच्छा कलाकार वही बना सकता है जिसने थिएटर किया हो। मेरी तरफ से सभी कलाकारों को रंगमंच दिवस की शुभकामनाएं।- अर्चना ठकराल, कवयित्री
थिएटर करने से एक कलाकार को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं शिक्षक हूं व शिक्षा से जुड़ा हुआ हूं। लेकिन मुझे थिएटर देखना बहुत ही अच्छा लगता है। आज एक समाज को सच्चे थिएटर की जरूरत है
विभौर भारद्वाज, शिक्षक
किसी सीन को करने से पहले लंबी-लंबी रिहर्सल करना हमें थिएटर ही सिखाता है। एक कलाकार के लिए थिएटर सबसे बड़ा प्लेटफार्म है। थिएटर में गलती की गुंजाइश बिल्कुल नहीं होती। - देवांश, छात्र जीजेयू, रंगमंच कलाकार
थिएटर से मेरा जुड़ाव शुरू से ही रहा है। मुझे लगता है कि थिएटर करना किसी रिफ्रेशर कोर्स को करने जैसा होता है। थिएटर में काम करने से अंदर के कलाकार को एनर्जी मिलती है। - अपूर्व भारद्वाज, रंगमंच कलाकार