ट्रैक्टर में कंपन और शोर की बात की जाए तो इसमें 52 प्रतिशत कंपन और 20.52 प्रतिशत शोर बीआईएस कोड की अधिकतम अनुमेय सीमा से कम पाया गया। ट्रैक्टर में ऑपरेटर के पास इंजन ना होने के कारण तपिश भी पैदा नही होती जो ऑपरेटर के लिए बिलकुल आरामदायक साबित होगा। उनके अनुसार डीजल के बढ़ते हुए दामों को देखते हुए यह ट्रैक्टर किसानों के लिए काफी किफायती साबित होगा जिससे उनकी आमदनी में भी इजाफा होगा।
इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान बुदनी के पूर्व निदेशक एमएल मेहता, बैटरी चालित ट्रैक्टर के निर्माता विकास गोयल, विवि की ओर से इंजीनियरिंग कॉलेज के डीन डॉ. अमरजीत कालरा, अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत, डीन पीजीएस डॉ. अतुल ढींगरा, कृषि मशीनरी व पावर इंजीनियरिंग विभाग से डॉ. विजया रानी ने बैटरी से चलने वाला ट्रैक्टर के विकास की सराहना की।