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फार्मेसी में फर्जीवाड़ा: सर्टिफिकेट लेने वाले डिप्लोमा होल्डर को किया जाएगा जांच में शामिल

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हिसार। हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के भ्रष्टाचार मामले में विजिलेंस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पंचकूला से लिए फार्मेसी रिकॉर्ड का अध्ययन शुरू कर दिया है। हिसार विजिलेंस के डीएसपी जीत सिंह ने बताया कि टीम उन डिप्लोमा होल्डरों को भी जांच में शामिल करेगी जिन्होंने रुपये देकर सर्टिफिकेट लिया है। फिलहाल एसआईटी के सदस्य रिकॉर्ड का अध्ययन करने में जुटे है।
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पंचकूला से बरामद किया रिकॉर्ड
विजिलेंस की एसआईटी ने मामला उजागर होने के बाद मंगलवार को पंचकूला में हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के ऑफिस से रिकॉर्ड लिया है। उसके बाद से टीम के सदस्य 2022 के पीछे के सालों के रिकॉर्ड का अध्ययन कर रहे है। जांच के बाद जिन डिप्लोमा होल्डरों ने रुपये लेकर सर्टिफिकेट लिए है उनको भी जांच में शामिल किया जाएगा। वहीं टीम काउंसिल के प्रधान धनेश और रजिस्ट्रार राजकुमार वर्मा की तलाश में छापामार कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल अभी तक दोनों पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।
गौरतलब है कि विजिलेंस टीम ने रविवार को भिवानी में छापा मारकर कार्रवाई करते हुए विद्यानगर निवासी सुभाष अरोड़ा को 35 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। चरखी दादरी के भागवी निवासी सत्यवान का आरोप था कि उसके बेटे सशान ने मेडिकल स्टोर चलाने के लिए लाइसेंस अप्लाई किया था। सुभाष अरोड़ा ने लाइसेंस देने की एवज में 65 हजार रुपये मांगे थे। 30 हजार रुपये ऑनलाइन दिए थे और 35 हजार रुपये लेते समय विजिलेंस ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया था। पूछताछ में सुभाष ने हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के उप प्रधान सोहनलाल को हिसार के सेक्टर 13 से पकड़ा था। जांच में काउंसिल के प्रधान धनेश अदलखा और रजिस्ट्रार राजकुमार का नाम भी भ्रष्टाचार मामले में सामने आया है। विजिलेंस टीम आरोपी उप प्रधान सोहनलाल से 1 लाख 82 हजार रुपये की नकदी बरामद कर चुकी है।
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