हिसार। दो दिन में करीब 190 एमएम बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है। कपास में करीब 80 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। वहीं मूंग की फसल पूरी बर्बाद हो चुकी है। किसानों ने सरकार से विशेष गिरदावरी करवाकर मुआवजे की मांग की है।
जिले में करीब दो लाख हेक्टेयर में फसल की बुआई की गई हैं। सबसे अधिक 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर में कपास, दूसरी सबसे अधिक 20 हजार हेक्टेयर में बाजरा की फसल है। तीसरी सबसे अधिक क्षेत्र वाली फसल मूंग 18 हजार हेक्टेयर में है। कपास और मूंग की फसलों में सबसे अधिक नुकसान है। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता एवं पूर्व जिला पार्षद मनोज राठी ने कुछ गांवों में पहुंचकर किसानों से बातचीत की। युवा कांग्रेस के पूर्व महासचिव मनोज टाक माही ने कहा कि 70 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।
गिरदावरी के नाम पर खानापूर्ति करने की बजाए हर एक खेत में जाकर गहनता से निरीक्षण कराया जाए। इसमें नुकसान का सही आकलन कर किसान को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए। एक महीने के तय समय में मुआवजा प्रदान किया जाए। किसान अगली फसल बिजाई की तैयारी कर सकें। - हरपाल सिंह बूरा, पूर्व सदस्य टैक्स ट्रिब्यूनल, हरियाणा
लाडवा, डाबड़ा भगाना, मय्यड़, रायपुर, शिकारपुर, नियाणा में सबसे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। किसानों के साथ गिरादवरी व मुआवजे के नाम पर मजाक न किया जाए। पिछले वर्ष खराब हुई फसलों का मुआवजा आज तक नहीं मिला है। जिसके लिए किसान धरने पर बैठे हैं। बीमा न कराने वाले किसानों को भी 50 हजार रुपये एकड़ के अनुसार मुआवजा दिया जाए।
कृष्ण सातरोड़, पूर्व जिला पार्षद, हिसार
किसानों को कम से कम 70 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए। कपास, मूंग की फसल लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक नष्ट हो चुकी है। किसानों ने कर्ज लेकर फसलों को लगाया था। अब उनके पास कुछ नहीं बचा है। अगर मुआवजा नहीं दिया गया तो सड़कों पर उतरेंगे। प्रभावित किसानों को आगामी फसल के लिए खाद-बीज पर भी रियायत दी जाए।
रणदीप लोहचब, राष्ट्रीय अध्यक्ष, न्याय पक्ष