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किसान बोले : तूड़ी का सीजन साल में एक बार आता है, सरकार को महंगाई पर लगानी चाहिए धारा 144

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संदीप रामायण
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हिसार। गेहूं कटाई का सीजन चला हुआ। किसान, मजदूर व पशुपालक गेहूं के साथ-साथ अपने पशुओं के लिए सूखा चारा एकत्रित करने में जुटे हैं। वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा सूखे चारे यानी तूड़ी पर धारा 144 लगाई गई है। इसका सीधा असर एक गांव से दूसरे गांव में तूड़ी खरीदकर ले जाने वाले किसानों व पशुपालकों पर पड़ा है। प्रदेश में पशुओं के चारे के संकट को दूर करने के लिए तूड़ी से लदे वाहनों को दूसरे जिलों व राज्यों में ले जाने पर रोक लगाना शुरू हो गया है। जगह-जगह पुलिस नाके लगाकर वाहनों के चालान तक काटने लगी है। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार कह रही थी किसान अपना अनाज-चारा कहीं भी बेच सकता है। अब बेच रहा है तो धारा 144 लगा दी। लोकतंत्र का मजाक बना रखा है।
रविवार को जिले सड़कों पर तूड़ी ढोने वाले वाहन नजर नहीं आए। किसानों का कहना है कि पुलिस द्वारा तूड़ी वाले वाहनों के चालान काटे जा रहे हैं। इस कारण लोग अपने पशुओं के लिए तूड़ी खरीद कर घर नहीं ले जा पा रहे हैं। धारा 144 लगने पर किसान अपनी पैदावार भी मनचाही जगहों पर नहीं बेच पा रहा है। हिसार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं इनेलो नेता जितेंद्र श्योराण ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में गेहूं की तूड़ी को लेकर लगाई गई धारा 144 पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार का किसान विरोधी व तानाशाही फैसला है। किसान नेताओं ने कहा कि पुलिस द्वारा तूड़ी के वाहन पकड़कर गोशालाओं में भेजा रहा है। किसानों का कहना है कि गोशालाएं तो पहले भी किसानों द्वारा दान दिए गए अनाज व सूखे चारे पर ही चलती हैं। संवाद
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अबकी बार कम हुई है पैदावार
किसान कुलदीप, सोनू, सरदानंद, काला सहित अन्य किसानों ने बताया कि बे-मौसमी बारिश आने से फसल खराब हो गई थी। इसके बाद तापमान बढ़ने से गेहूं का दाना सिकुड़ कर कमजोर हो गया था। वहीं गेहूं बिजाई से समय किसानों को समय पर डीएपी व यूरिया खाद तक नहीं मिला था। उस कारण बिजाई भी लेट हुई थी। इन कारणों से गेहूं की पैदावार कम हुई है। पैदावार कम होने से तूड़ी कुछ महंगी हो गई है।
इतना चल रहा है भाव
किसानों ने बताया कि इस सीजन में रिपर वाली तूड़ी 5 से 6 हजार रुपये की 15 से 18 मण बिक रही है, जो पिछले साल 2 से 3 हजार रुपये थी। एक एकड़ की थ्रेसर वाली तूड़ी 16 से 20 हजार रुपये में बिक रही है, जो कि पिछले साल 8 से 10 हजार रुपये थी। अपने पशुओं के लिए तूड़ी खरीदने वाले किसान, मजदूर व पशुपालकों को कम रेट पर भी तूड़ी दी है। कॉमर्शियल प्रयोग के लिए महंगी दी जा रही है।
किसानों के साथ सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है। तूड़ी के वाहनों पर धारा 144 लगाना सही नहीं है। यह किसानों के हकों का हनन करने के बराबर है। पेट्रोल, डीजल सहित अन्य चीजें महंगी हुई हैं। ये सीजन का समय है, इन्हीं दिनों में किसान व मजदूर अनाज व एक साल के लिए पशुओं के लिए सूखा चारा एकत्रित करता है। ऐसे में तूड़ी वाले वाहनों पर धारा 144 लगाने के विरोध में आंदोलन किया जाएगा। जल्द ही बैठक करेंगे। - काला कनोह, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन चढूनी
सरिया 45 रुपये से 100 रुपये और पेट्रोल 100 के पार हो गया। अदानी का कोयला 6 हजार से 24 हजार रुपये हो गया। बिजली 3 रुपये से 12 रुपये प्रति यूनिट हो गई। अगर धारा 144 लगानी है तो इन पर लगानी चाहिए। सिर्फ तूड़ी के वाहनों पर ही क्यों लगाई है। सरकार का ये फैसला गलत है। हरियाणा के किसानों के राजस्थान, पंजाब व उतरप्रदेश के किसानों से संबंध है। ऐसे में वे एक-दूसरे के पास सूखा चारा क्यों नहीं पहुंचा सकते। - विकास सातरोड़, भारतीय किसान यूनियन हिसार
कृषि कानून लागू करके भाजपा प्रचार कर रही थी कि किसान कहीं पर भी अपनी फसल बेच सकते हैं, लेकिन अब किसानों को पशुओं का चारा भी नहीं बेचने दिया जा रहा। महंगाई के चलते आम जरूरत की चीज तेल, कोयला, सरिया या अन्य पदार्थों के दाम बहुत बढ़ गए हैं। लेकिन इसको लेकर सरकार ने कहीं भी धारा 144 नहीं लगाई। सरकार का ये तानाशाही फैसला है। जल्द ही बैठक करके निर्णय लेंगे व आंदोलन करेंगे। - कुलदीप खरड़, युवा जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन हिसार
इंडियन नेशनल लोकदल सरकार की इस तानाशाही को बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर किसानों के खिलाफ कोई भी कदम उठाया गया तो इनेलो आमवर्ग व किसानों को साथ लेकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएगी। तूड़ी पर लगाई गई धारा 144 हटाई जाए। सरकार पहले भी इस तरह के फरमान जारी करती रही है, लेकिन विरोध के चलते सरकार को यू टर्न लेना पड़ा। अब भी सरकार को अपने आदेश वापस लेने पड़ेंगे। - जितेंद्र श्योराण, इनेलो नेता, अध्यक्ष हिसार संघर्ष समिति
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किसान की तूड़ी पर धारा 144 और अदानी-अंबानी के प्रोडक्ट पर कोई रोक नहीं है। ये दोगला व्यवहार हम किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। किसान की फसल अबकी बार बे-मौसम बारिश आने से खराब हो गई थी। फिर समय से पहले गर्मी के आने से गेहूं के दाने सिकुड़ गए थे, जिसके कारण प्रति एकड़ 15 मण गेहूं और तूड़ी कम हुई है। दो महीने पहले सरकार कह रही थी किसान अपना अनाज कहीं भी बेच सकता है। अब बेच रहा है तो धारा 144 लगा दी। लोकतंत्र का मजाक बना रखा है। कानून सबके लिए बराबर है। हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। - सरदानंद राजली, संयुक्त किसान मोर्चा हिसार
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