हिसार। खेेती में सबसे ज्यादा दिक्कत धान की फसल की सफाई करने में आती हैं। किसानों के इस समाधान के लिए गांव बड़ी सातरोड़ के रहने वाले राजेंद्र सिंह ने सुपर पावर नामक फैन बनाया। उन्होंने यह फैन खेती में फसल की सफाई से परेशान होकर और लेबर से अधिक समय खराब होने के लिए बनाया हैं।
राजेंद्र बताते हैं कि खेती में फसल को साफ रखने के लिए एक किसान को सबसे ज्यादा दिक्कत धान की सफाई के लिए आती हैं। धान में सबसे ज्यादा कचरा होता है। उसको साफ करने के लिए किसान को ज्यादा समय लगता है। बार-बार साफ करने के लिए इसे रि-साइकिलिंग करना पड़ता है। जिस दौरान अधिक समय, अधिक लेबर, अधिक डीजल की जरूरत पड़ती है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए एक नई मशीन बनाई। जिसका नाम रखा सुपर पावर फैन। इस मशीन से लेबर की कम जरूरत पड़ती है।
इस पंखे में किसान को फसल को उठाकर सीधा इसमें डालना होता है। ऑटोमेटिक मशीन होने के कारण यह फसल को अपने आप उठा लेती है। एलिमिनेटर की सहायता से इसमें काम चलता रहता है। सुरक्षा का ध्यान रखते हुए इसमें जालियां लगाई गई हैं। इसकी किसानों में डिमांड बहुत अधिक है। सुपर पावर फैन को एचएयू के कृषि व्यवसाय ऊष्मायन केंद्र में काफी सराहाया गया। डिजाइन और इसकी अच्छी गुणवत्ता के लिए इसे चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय स्थित एग्री बिजनेस इन्क्यूवेशन सेंटर (एबिक) की ओर से प्रथम पुरस्कार मिला।
आम पंखा एक घंटे में 50 मण की क्षमता से करता है काम
आम पंखे जहां एक घंटे के अंदर 50 मण की क्षमता से काम करता है। वहीं सुपर पावर फैन 1 घंटे के अंदर 200 मण की क्षमता से काम करता है। इससे 80 क्विंटल की कैपेसिटी अधिक रहती है। 1 से 3 घंटे के अंदर 4 गुना काम करता है। जिस कारण डीजल की खासतौर पर बचत रहती है। राजेंद्र ने बताया कि एक किसान ने बिना किसी रखरखाव के एक से डेढ़ महीने में इस सुपर पावर फैन से काम कर साढ़े सात सौ एकड़ इस पंखे से निकाले। इससे किसान को तीन से चार लाख का बेनिफिट हुआ है।
इस मशीन के अंदर गेहूं, ज्वार, चना बाजरा, सरसों आदि की सफाई होती है। इस मशीन में दाने टूटने का कोई डर नहीं होता। मशीन के अंदर जो बेल्ट लगाई गई है, वह सॉफ्ट है इसमें कोई भी लोहे की आइटम नहीं है। इसमें दाना टूटेगा नहीं, जितनी बार दाना रि-साइकिल होगा, उसमें चमक उतनी ही आएगी। इसमें सफाई के साथ कोई गंदगी भी नहीं आती।
आम फैन और सुपर पावर फैन में तुलना
साधारण फैन सुपर पावर फैन
लेबर : 4-5 1-2
क्षमता : 16-24 क्विंटल 60-80 क्विंटल
डीजल खर्च : करीब एक लीटर प्रति एकड़ आधा से पोना लीटर प्रति एकड़
प्रक्रिया : कठिन आसान
रखरखाव : ज्यादा खर्चा कोई खर्च नहीं
फसल सफाई - बार-बार झारना एक बार में पूरी
इस पंखे को बनाना 2018 में शुरू किया था। यह 2020 में बनकर तैयार हुआ। समय के साथ-साथ इसमें औजारों को लेकर काफी बदलाव किए गए हैं। - राजेंद्र सिंह, किसान, सातरोड़ कलां