अग्रोहा (हिसार)। पुरातत्व विभाग की ओर से अग्रोहा टीले की खुदाई का कार्य एक सप्ताह से पहले ही सोमवार से बंद हो गया। पिछले सप्ताह बुधवार को टीले की खुदाई का शुरू हुआ था। टीले की खुदाई का कार्य आगामी आदेशों तक बंद रहेगा।
टीले की पहले दिन बुधवार को सुबह भूमि पूजन कर खुदाई कार्य का शुभारंभ किया गया था। इससे पहले दिन करीब दो इंच तक की खुदाई की गई थी। टीले की खुदाई का कार्य बारीकी से किया जा रहा था। पुरातत्व विभाग की उपनिर्देशक बनानी भट्टाचार्य के नेतृत्व में टीम खुदाई की गई। टीले की लगातार हो रही रविवार तक खुदाई के दौरान कुछ प्राचीन अवशेष मिलने शुरू हुए थे। उन्हें शोध के लिए भेजा गया है।
इस दौरान भट्टाचार्य ने बताया कि पिछले सप्ताह बुधवार को शुभारंभ से लेकर रविवार तक करीब 5-6 दिनों की खुदाई के दौरान टीले पर मिट्टी के बर्तनों के कुछ अवशेष और सीढ़ीनुमा महल की दो दीवारें भी दिखी हैं। इस टीले पर रविवार को खुदाई के दौरान एक महल में भवन की दीवारों का ढांचा मिला था। इस स्थल पर तीन अलग-अलग ट्रेंच में खुदाई की जा रही है।
खुदाई में कुछ मिट्टी के खिलौनेनुमा वस्तु, कुल्हड़, मिट्टी के ढक्कन, सिलबट्टेनुमा पत्थर, मिट्टी के छोटे गोल बर्तन मिट्टी के गोल मनके जैसी सामग्री मिली है। यह वस्तुएं कब की है यह जानने के लिए शोध की जरूरत है। इसलिए इन वस्तुओं को कार्बन डेटिंग के लिए भेजा जाएगा। इससे उनकी प्राचीनता का पता चल सकेगा।
पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक बनानी भट्टाचार्य के नेतृत्व में लगी 15 सदस्य टीम की एक सप्ताह के लिए छुट्टी हो गई है। टीले की खुदाई बहुत ही बारीकी से की गई, जिसमें खुदाई के दौरान निकलने वाली रेत, कंकड़, पत्थर सहित अन्य सामग्री की कई ढेरी बनाई गई है।
खुदाई के दौरान निकलने वाली सामग्री के कई सैंपल के लिए हर ढेरी के हिसाब से नजदीक पत्थर के नीचे नमूने की चिट रखी गई है, ताकि विभाग के उच्च अधिकारी और वैज्ञानिक आने पर शोध के दौरान आसानी से पता लगाया जा सके। अब खुदाई का कार्य बंद होने से खोदे गए ट्रेंच को प्लास्टिक का तिरपाल लगाकर ढक दिया गया है, ताकि बारिश और तेज हवा आदि से बचाव हो सके।