हांसी जिले के गांव राखीगढ़ी टीला नंबर दो पर 17 मार्च काे खोदाई करती टीम। आर्काइव
हिसार। जिले के ऐतिहासिक गांव राखीगढ़ी में बारिश के कारण भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम ने शुक्रवार को खोदाई का काम अस्थायी रूप से रोक दिया। शोध कार्य जारी रखते हुए टीम ने टीला नंबर-2 से मिट्टी के सैंपल एकत्र किए जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन सैंपलों की जांच के बाद हड़प्पा सभ्यता से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है।
अधिकारियों के अनुसार बारिश के कारण मिट्टी में नमी बढ़ गई है जिससे खोदाई करना तकनीकी रूप से कठिन हो जाता है। इसके अलावा खोदाई के दौरान मिलने वाले अवशेषों को सुरक्षित रखना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में स्थल को नुकसान से बचाने के लिए फिलहाल खोदाई का कार्य रोक दिया गया है।
विभाग की टीम ने बताया कि टीला नंबर-2 से लगातार कच्ची ईंटें भी निकल रही हैं जो प्राचीन संरचनाओं के संकेत देती हैं। इनसे संबंधित मिट्टी के नमूनों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा गया है जिससे उस समय की जीवनशैली, पर्यावरण और अन्य ऐतिहासिक पहलुओं की जानकारी मिल सकेगी।
अधिकारियों ने बताया कि राखीगढ़ी में टीला नंबर-6 और टीला नंबर-7 पर भी खोदाई की योजना बनाई गई थी। इन स्थानों पर खोदाई का काम शुरू भी किया गया लेकिन बारिश के कारण इसे रोकना पड़ा और केवल एक दिन ही खोदाई हो सकी।
राखीगढ़ी देश के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में से एक माना जाता है जहां समय-समय पर महत्वपूर्ण खोजें सामने आती रही हैं। ऐसे में यहां चल रहा हर शोध कार्य प्राचीन इतिहास के नए पहलुओं को उजागर करने में अहम भूमिका निभाता है।
बारिश की वजह से खोदाई का काम रोक दिया गया है। ऐसे मौसम में खोदाई करना मुश्किल होता है। जैसे ही मौसम अनुकूल होगा, खोदाई का कार्य फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
- मनोज सक्सेना, सुपरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट, पंडित दीन दयाल उपाध्याय पुरातत्व संस्थान, ग्रेटर नोएडा।