प्रदेश में ई-नंबरदार नामक सॉफ्टवेयर के माध्यम से सभी नंबरदारों को एक क्लिक पर लाया जाएगा। सभी राजस्व अधिकारी का भू-रिकॉर्ड ऑनलाइन मिल जाएगा, जिससे जमीन की खरीद-फरोख्त में होने वाली धोखाधड़ी पर पूर्ण अंकुश लग सकेगा।
राजस्व अधिकारी पांच सितंबर तक सभी नंबरदारों का डाटा अपलोड करें। मंडल के आयुक्त राजीव रंजन ने बुधवार को गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में राजस्व विभाग के अधिकारियों की एक बैठक को संबोधित किया।
आयुक्त राजीव रंजन ने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि सभी प्रकार के भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन करके न केवल इसमें शुद्धता लाई जाए, बल्कि भूमि की खरीद-फरोख्त में होने वाली धोखाधड़ी पर भी पूरी तरह से रोक लगे।
जमीन की रजिस्ट्री होने के साथ ही उसका रिकॉर्ड ऑनलाइन करें, इंतकाल वाले मामलों की ऑनलाइन फीस ली जाए। इंतकाल दर्ज करके उसे सॉफ्टवेयर में अपडेट करें। यदि किसी जमीन का विवाद न्यायालय में विचाराधीन है तो उसे भी अपलोड करें, ताकि रजिस्ट्री करते समय तहसीलदार, नायब तहसीलदार को पता चले कि यह जमीन विवादित है और फैसला आने तक उसकी रजिस्ट्री न की जाए।
यह रहे मौजूद
इस अवसर पर फतेहाबाद के डीसी एनके सोलंकी, भिवानी के डीसी पंकज, हिसार के एडीसी विजय कुमार, सिरसा के एडीसी अजय तोमर, एसडीएम अशोक बंसल, सतीश कुमार, शालिनी चेतल, सतबीर सिंह, पूजा चांवरिया, सतबीर सिंह, विजेंद्र हुड्डा, देवीलाल सिहाग, बीर सिंह, संगीता, डीआरओ विजेंद्र भारद्वाज, रामसिंह बिश्नोई सहित सभी जिलों के तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जिला सूचना अधिकारी, एनआईसी के निदेशक एमपी कुलश्रेष्ठ अधिकारी, कर्मचारी भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि सभी गांवों के नंबरदारों का रिकॉर्ड भी अब ऑनलाइन किया जाएगा। उन्होंने सभी राजस्व अधिकारियों को 5 सितंबर तक अपने अधीन आने वाले नंबरदारों का पूरा विवरण फोटो सहित ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश दिए।
इसके लिए जल्द ही नंबरदारों की बैठक बुलाकर उनका विवरण जुटाने को कहा। दूसरों की तसदीक करने वाले नंबरदारों की तसदीक ऑनलाइन मोबाइल पर भी हो सकेगी। हर जिले में एक नोडल ऑपरेटर लगाया जाए, जो नए नंबरदार की नियुक्ति के साथ ही उसका पूरा विवरण ऑनलाइन करे। विवरणों को दो बार चेक करने के बाद ही अपलोड किया जाए। अधिकारी भूमि रिकॉर्ड की हाथ से बनाई नकल न दें, बल्कि कंप्यूटराइज्ड कॉपी ही दें।