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एस्टीमेट को तकनीकी मंजूरी न मिलने से सातरोड़ के पास प्रस्तावित आरओबी की टेंडर प्रक्रिया बेपटरी

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सातरोड़ के नजदीक साउथ बाईपास पर रेलवे फाटक से गुजरते वाहन। संवाद - फोटो : Hisar
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हिसार। शहर के साउथ बाईपास पर सातरोड़ के नजदीक फाटक पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के एस्टीमेट को तकनीकी मंजूरी नहीं मिली है। इस कारण टेंडर प्रक्रिया अधर में लटक गई है। स्थिति यह है कि विभाग बार-बार टेंडर खुलने की तिथि को आगे बढ़ा रहा है। अब तक इसमें पांच बार बदलाव किया जा चुका है। टेंडर के न खुलने से आरओबी का निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो पा रहा है।
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उधर, विभाग का कहना है कि बिजली निगम व स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पब्लिक यूटिलिटी की सेंक्शन न देने के कारण यह अड़चन आई है। मुख्यमंत्री ने अगस्त 2018 में इस आरओबी को बनाने की घोषणा की थी। बता दें कि इस आरओबी के टेंडर खुलने की सबसे पहले तिथि 19 अगस्त रखी गई थी। इस समय तक आरओबी के एस्टीमेट को तकनीकी मंजूरी नहीं मिली थी। मगर विभाग यह मान कर चल रहा था कि तब तक मंजूरी मिल जाएगी। 19 अगस्त तक मंजूरी न मिलने के कारण विभाग ने टेंडर खुलने की तिथि को बढ़ाकर 26 अगस्त कर दिया, लेकिन तब भी एस्टीमेट को तकनीकी मंजूरी नहीं मिली। चार बार टेंडर खुलने की तिथि को बढ़ाया जा चुका है। अब टेंडर खुलने की तिथि 1 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
बिजली निगम व जनस्वास्थ्य विभाग के कारण आई अड़चन
बीएंडआर के अधिकारियों के अनुसार यहां से बिजली की लाइन व सीवर लाइन गुजर रही है, जिन्हें शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए दोनों विभागों से इस काम काम की सेंक्शन जमा नहीं करवाई है। इस सेंक्शन के न मिलने से एस्टीमेट को तकनीकी मंजूरी नहीं दी जा रही है।
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प्रोजेक्ट की प्रक्रिया
किसी को भी प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने से पहले एक निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा जाता है।
- प्रोजेक्ट की घोषणा
- वित्तीय मंजूरी
- फिजिबिलिटी चेकिंग
- रफ कॉस्ट एस्टीमेट
- डिटेल्ड एस्टीमेट
- डीएनआईटी
- टेंडर आमंत्रित करना
- टेंडर खोलना
- वर्क ऑडर जारी करना
(नोट-डिटेल्ड एस्टीमेट को तकनीकी मंजूरी दिलवानी होती है।)
31.10 करोड़ की लागत से तैयार किया जाना है आरओबी
आरओबी पर करीब 31.10 करोड़ रुपये की लागत आएगी। आरओबी की कुल लंबाई 658 मीटर होगी। सड़क की चौड़ाई 11 मीटर होगी। आरओबी के लिए 16 पिलर का निर्माण किया जाएगा। इसके दोनों तरफ तीन-तीन मीटर की सर्विस रोड भी बनाई जाएगी। यह आरओबी दिल्ली रोड को पार करके सातरोड़ में जाकर खत्म होगा। सातरोड़, हिसार की तरफ व दिल्ली की तरफ इसकी लंबाई 148-148 मीटर होगी।
बो स्ट्रिंग डिजाइन का बनेगा यह आरओबी
यह आरओबी दो तरह से खास होगा। पहला यह है कि इस आरओबी पर चौराहा बनाया जाएगा। अभी तक शहर के किसी भी आरओबी पर चौराहा नहीं बना है। दूसरा यह बो स्ट्रिंग डिजाइन (धनुष का आकार) से बनेगा। इससे पहले कैमरी रोड रेलवे ओवरब्रिज भी इसी डिजाइन से बनाया जा रहा है। दरअसल जब रेलवे लाइनों के साथ बनने वाले पिलरों के बीच की दूरी ज्यादा रहती है तो उस स्थिति में आरओबी इस डिजाइन से बनाया जाता है।
शहर का सातवां आरओबी होगा
यह शहर का सातवां आरओबी होगा। इससे पहले डाबड़ा चौक, लक्ष्मीबाई चौक, पुरानी सब्जी मंडी व सेक्टर 16-17 स्थित रेलवे फाटकों पर आरओबी का निर्माण किया जा चुका है। इसके अलावा कैमरी रोड व सूर्य नगर रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है।
10 हजार वाहन चालकों को होगा फायदा
इस आरओबी के बनने से साउथ बाईपास से प्रतिदिन गुजरने वाले 10 हजार वाहन चालकों को फायदा होगा। करीब 21 किलोमीटर लंबे साउथ बाईपास पर तीन रेलवे फाटक स्थित हैं। बाईपास को फाटक फ्री किया जाना है, जिसे लेकर इन फाटकों पर आरओबी का निर्माण किया जाना है। इनमें से सेक्टर 16-17 स्थित रेलवे फाटक पर आरओबी का निर्माण किया जा चुका है।
पब्लिक यूटिलिटी के ट्रांसफर को लेकर संबंधित विभागों ने सेंक्शन जमा नहीं करवाई है, जिस कारण एस्टीमेट को तकनीकी मंजूरी नहीं मिल रही है। तकनीकी मंजूरी के बिना टेंडर अलॉट कर दिया तो बाद में एजेंसी को दिक्कत आएगी। - रजनीश कुमार, एक्सईएन, बीएंडआर
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