हिसार। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर बनाने के चक्कर में हजारों परिवारों ने खुद के कच्चे घर तोड़ दिए और बेघर हो गए। किसी को पहली तो किसी को दूसरी किस्त नहीं मिली, जिस कारण बारिश के मौसम में ये परिवार मुसीबत झेल रहे हैं। जरूरतमंदों को समय पर योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। लिस्ट में नाम आने के वाले जरूरतमंद लोगों को भी इस योजना की पहली किस्त तक नहीं मिली है।
अमर उजाला के संवाद संवाददाता ने रविवार को हांसी के रामायण गांव में योजना की हकीकत जानी। यहां कुछ ऐसे परिवार मिले जिनके लिस्ट में तो नाम थे लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की एक भी किस्त नहीं मिली। सरकारी तंत्र के आगे विवश हुए ये लोग जर्जर घरों में रहने को मजबूर हैं, इनका कहना है कि हमें डर रहता है कि कहीं हमारा घर बारिश में गिर न जाए। बादल की गरज के साथ हमारे कच्चे व जर्जर घरों की छत हिलती है। ऐसे हालातों में हमारी जिंदगी नरक से भी बदतर हो गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के जरूरतमंद ये रामायण गांव के लोग संबधित अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का शिकार हुए हैं।
ये लोग पिछले कई सालों से प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन करते आ रहे हैं। सर्वे के दौरान जिन लोगों के मकान कच्चे व जर्जर हालात में मिले थे, उनको भी फाइनल लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। इस कारण ये जरूरतमंद लोग अपने पक्के मकान बनाने से वंचित रह गए हैं।
मेरा मकान गली से करीब 3 फुट नीचा हो गया है। बारिश का पानी घर में भर जाता है। घर काफी जर्जर हालात मे है। मैंने पक्का मकान बनाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का आवेदन किया था। सर्वे के दौरान मेरा नाम काट दिया। मैं हैैरान हूं कि मेरा मकान जर्जर होने के बाद भी मेरा नाम काट दिया। हमारी मांग है कि सर्वे दोबारा किया जाए। - बिट्टू, रामायण निवासी
हमारा घर जर्जर हालात में है। थोड़ी सी बारिश में पानी भर जाता है। रात जागकर काटनी पड़ती है। डर रहता है कि कहीं मकान गिर न जाए। हमने दो साल पहले पक्का मकान बनाने के लिए फार्म भरा था। लिस्ट मेें हमारा नाम भी आ गया था। कई बार कर्मचारी घर का फोटो भी खींच कर ले गए थे, लेकिन अभी तक हमें एक भी किस्त नहीं मिली। - कन्हैया, रामायण निवासी
हमारा मकान काफी जर्जर हो चुका है। मकान में दरार आई हुई हैं। हमें डर है कि कहीं गिर न जाए। बारिश का मौसम तो हमारे लिए मुसीबत बनकर आता है। पक्का मकान बनाने के लिए फार्म भरा हुआ है, सर्वे लिस्ट में भी नाम आया था, लेकिन अभी तक हमें एक भी किस्त नहीं मिली है। किस्त न मिलने के कारण हमें चिनाई का कार्य शुरू नहीं कर पा रहे हैं। - बीरमती, रामायण निवासी
हमारा घर दो साल पहले बारिश में गिर गया था। कई महीने तक हम उसी मकान में रहे। प्रधानमंत्री आवास योजना की लिस्ट में हमारा नाम भी आ गया था। कई महीनों तक किस्त का इंतजार किया, लेकिन हमें किस्त नहीं मिली। फिर हमें कहा गया कि लिस्ट में तो नाम आ गया है। एक बार मकान बना लो, बाद में रुपये आ जाएंगे। इसके बाद हमनें किसी से ब्याज पर रुपये लेकर मकान बना लिया। पक्का बनने के बाद उन्होंने लिस्ट से नाम ही काट दिया। अगर समय पर योजना के रुपये मिल जाते तो हमें ब्याज पर रुपये नहीं लेने पड़ते। - सुनीता, रामायण निवासी
मुझे प्रधानमंत्री आवास योजना व मकान बनाने की अन्य किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है। मेरा मकान रहने के भी लायक नहीं है। एक कमरे की छत नहीं है व जिसकी छत है व कच्ची है। बारिश का पानी छत से टपकने लगता है। - राकेश कुमार
अपना मकान दिखाता बिट्टू। - फोटो : Hisar