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Hisar: पत्नी की हत्या के मामले में एचआईवी पीड़ित दोषी को उम्रकैद, जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध कराने के आदेश

Fri, 30 Sep 2022 11:21 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)

सार

सजा कम कराने के लिए अभियुक्त ने एचआईवी पीड़ित होने का भी हवाला दिया। अदालत ने जेल अधीक्षक को जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। सदर हांसी थाना पुलिस ने 11 जनवरी, 2021 को मृत विवाहिता की सोनीपत निवासी मां की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की थी।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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हरियाणा के हिसार में विशेष अदालत के न्यायाधीश अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने एक एचआईवी पीड़ित अभियुक्त को पत्नी की हत्या में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अभियुक्त पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में सजा की अवधि तीन माह अतिरिक्त बढ़ा दी जाएगी। अदालत ने जेल अधीक्षक को आदेश दिए हैं कि दोषी को उसकी जीवन रक्षक दवाइयां नियमित आधार पर उपलब्ध करवाई जाए।

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सदर हांसी थाना पुलिस ने 11 जनवरी, 2021 को मृत विवाहिता की सोनीपत निवासी मां की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की थी। इस मामले में मृत विवाहिता के पति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस को दी शिकायत में मृत विवाहिता की मां ने बताया था कि उसने अपनी बड़ी बेटी की शादी वर्ष 2014 में आरोपी के साथ की थी, जो घटना के समय 25 साल की थी।

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शादी के बाद उसने तीन बच्चों को जन्म दिया। उसका पति अक्सर शराब पीकर उसकी बेटी को तंग करता था। 10 जनवरी, 2021 की रात को बेटी के देवर ने फोन कर बताया उसके भाई ने उसकी बेटी के साथ मारपीट की है। बाद में बताया कि आपकी बेटी की मौत हो चुकी है। बाद में मौके पर आकर पूछताछ की तो पता चला कि आरोपी ने शराब के नशे में मारपीट कर उसकी बेटी की हत्या कर दी।

इस मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के सात वर्षीय बेटा अपनी गवाही से मुकर गया। पुलिस द्वारा बरामद किए गए हथोड़े पर लगे खून और मृतका के खून का ग्रुप एक समान मिला। इसके अलावा आरोपी के भाई ने झगड़े की बात स्वीकार की और अपनी भाभी को घायलावस्था में अस्पताल में दाखिल करवाने की भी बात की, जिसकी बाद में मौत हो गई। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
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सजा कम करवाने के लिए दोषी ने अदालत से गुहार लगाई कि वह एक गरीब व्यक्ति है और एचआईवी से पीड़ित है। दवाइयों के सहारे उसकी जिंदगी कट रही है। उसने कहा कि वह जेल में सही ढंग से उपचार नहीं करवा पाएगा। इसके अलावा उसके बुढ़े माता-पिता व नाबालिग बच्चे भी हैं, जिनकी जिम्मेदारी भी उस पर है। अदालत ने दोषी पर कोई रहम नहीं की। अदालत ने माना कि वह जघन्य अपराध करने का भागीदार है। अदालत ने जेल अधीक्षक को आदेश दिया कि दोषी को जेल में जीवन रक्षक दवाइयां निरंतर उपलब्ध कराई जाए।

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