हरियाणा के हिसार में अदालत ने नकली चोट मारकर मेडिकल लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) के माध्यम से हत्या के प्रयास का केस दर्ज करवाने के लिए रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार दोषी मामा-भांजा को चार-चार साल कैद की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश वेद प्रकाश सिरोही की अदालत ने दोषी हिसार के हैबतपुर गांव निवासी बलविंदर व न्यू मॉडल टाउन निवासी कुलदीप पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में सजा की अवधि छह-छह माह अतिरिक्त बढ़ा दी जाएगी। दोषियों द्वारा शिकायतकर्ता से हड़पे 50 हजार रुपये भी वापस करने के आदेश दिए गए हैं।
इसी मामले के तीसरे आरोपी मेट्रो अस्पताल के संचालक डॉ. संजय वर्मा को अदालत ने बरी कर दिया था। इस बारे में सिविल लाइन थाना पुलिस ने गत 23 मार्च 2010 को राजस्थान के चुरू जिले के धानोठी छोटी गांव निवासी एडवोकेट हरदीप सिंह की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 195, 420, 34 व 511 के तहत मामला दर्ज किया था।
पुलिस को दी शिकायत में एडवोकेट हरदीप ने बताया था कि उसके व उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ राजस्थान पुलिस ने 25 दिसंबर 2009 को भारतीय दंड संहिता की धारा 148, 149, 323 व 325 के तहत एक झूठा केस दर्ज किया था। बाद में नकली चोट मारकर बनाई गई एमएलअर रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास की धारा भी जोड़ दी।
जब मामले की जांच की तो पता चला कि हिसार के कुछ चिकित्सक नकली चोट मारकर हत्या प्रयास की एमएलआर बनाते हैं। इसके बाद इस खेल में जुड़े दलालों का पता लगाया तो उसका संपर्क मेट्रो अस्पताल के कर्मचारी बलविंदर और एएमसी अस्पताल के कर्मचारी कुलदीप से हुआ। उन्होंने नकली चोट के लिए डेढ़ लाख रुपये का खर्चा बताया।
उन्होंने बताया कि इसके लिए वे कई चिकित्सकों की मदद लेकर आपके मरीज के सिर का ऑपरेशन करके हत्या के प्रयास की धारा वाली चोट मारेंगे और मरीज को नुकसान भी नहीं होगा। इसके बाद वह अपने दो सगे भाई पवन व राजेश कुमार और पिता ओमप्रकाश को लेकर हिसार आया और पवन का झूठा मेडिकल बनाने के लिए 50 हजार रुपये में बात पक्की की।
इसके बाद पुलिस की टीम गठित की गई और पवन को 50 हजार रुपये दे दिए। इसके बाद बलविंदर व कुलदीप को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। बलविंदर ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उन्होंने झूठा मेडिकल बनवाने के लिए डॉ. संजय वर्मा से बात करने के बाद पवन से 50 हजार रुपये लिए थे। इसके बाद पुलिस ने डॉ. संजय वर्मा को भी आरोपी बनाया।
मामले के शिकायतकर्ता एडवोकेट हरदीप ने कहा कि डॉ. संजय वर्मा को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ वे हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
नकली चोट असली नोट प्रकरण में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अल्का मलिक की अदालत ने गत 31 मार्च 2016 को सामान्य अस्पताल के तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूप सिंह व राजस्थान के दुमकी गांव निवासी जयवीर को दस-दस साल की कैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में डॉ. भूप सिंह को प्रदेश सरकार ने पहले ही बर्खास्त कर दिया था। यह मामला एडवोकेट हरदीप की शिकायत पर दर्ज किया गया था।