अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
न्यायिक दंडाधिकारी आशीष शर्मा की अदालत ने प्लॉट संबंधी धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में बरवाला के वार्ड नंबर तीन निवासी नंबरदार नरेश जावा और खरक पूनिया निवासी खरीदार नरेश कुमार को धोखाधड़ी के जुर्म में तीन-तीन साल की कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने तथा जालसाजी के जुर्म में तीन-तीन साल की कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। तीन साल की सजा पूरी होने पर दूसरी धाराओं की सजा शुरू होगी। यानी दोषियों को छह-छह साल जेल में बिताने पड़ेंगे।
बरवाला थाना पुलिस ने इस संबंध में 8 दिसंबर 2012 को धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। बरवाला के वार्ड नंबर 9 के नानक चंद ने शिकायत में कहा था कि उन्होंने बरवाला के प्रेमचंद से सन 1963 में एक प्लॉट खरीदा था और उस पर दो मंजिला भवन बनाकर रिहायश कर ली थी। उसने रजिस्ट्री कराने के बाद नगर पालिका से मकान का नक्शा पास कराया था। लेकिन इंतकाल नहीं करा पाया था। विक्रेता प्रेमचंद की मौत होने के बाद उनकी प्रॉपर्टी परिजनों के हिस्से में आ गई। आरोप है कि प्रेमचंद के बेटे नरेश ने गलत तरीके से इंतकाल कराकर वही प्लॉट खरक पूनिया के नरेेश को बेच दिया जबकि उस प्लॉट पर नानक चंद का मकान बना था। बाद में मामला कोर्ट में पहुंच गया था और लोकल कमीशन ने दौरा कर कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर कहा था कि मौके पर प्लॉट न होकर नानकचंद का मकान बना है। इसके एक हफ्ते बाद नरेश ने 23 अक्तूबर 2012 को जमीन को प्लॉट बताकर बेचा था। नानक चंद ने इस संबंध में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षडयंत्र रचने का केस दर्ज कराया था।
कोर्ट ने यह सजा सुनाई
शिकायतकर्ता के अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि कोर्ट ने धारा 420 के तहत दोनों को तीन-तीन साल की कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह सजा पूरी होने पर दूसरी धाराओं की सजा शुरू होगी। कोर्ट ने धारा 467 में तीन-तीन साल की कैद व तीन-तीन हजार जुर्माने, धारा 468 में तीन-तीन साल व एक-एक हजार रुपये जुर्माने और धारा 471 में दो-दो साल की कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। धारा 467, 468 व 471 के तहत सुनाई गई सजाएं साथ-साथ चलेंगी।