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बेटे से नहीं मिल पाती थी वीडियो कॉल कर हालचाल पूछती थी मरीजों की देखभाल करते समय दो बार हुई पॉजीटिव

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हिसार। देशभर में वीरवार को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जा रहा है। फ्लोरेंस नाइटिगेल की जयंती पर यह मनाया जाता है। कोरोना काल के दौरान नागरिक अस्पताल में काम करने वाली नर्सिंग ऑफिसर्स ने अपनी और अपनों की जान की परवाह किए बगैर दिनरात मरीजों की देखभाल की। गर्मी में पीपीटी किट पहनकर मरीजों के बीच रहीं। कई नर्सिंग कोरोना की शिकार भी हुईं। घर में अकेला रह कर अपना ध्यान रखा और अपनों को अपने से दूर रखा ताकि वे सुरक्षित रह सकें।
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पति पुलिस में ड्यूटी कर रहे थे बेटे को मौसी के पास छोड़ा
अमरदीप कॉलोनी में रहने वाली और नागरिक अस्पताल में इंफेक्शन कंट्रोल नर्सिंग ऑफिसर प्रोमिला ने बताया कि पति पुलिस में ड्यूटी के चलते बाहर थे। बेटे आर्यन को मौसी के पास छोड़ा, ताकि वह संक्रमित न हो। दिनरात अस्पताल में मरीजों की देखभाल की। बेटे से वीडियो कॉल के जरिये बात होती रही। बेटा मिलने के लिए रोता रहता था। मरीजों की देखभाल के दौरान दो बार कोरोना पॉजीटिव हुई। घर के बाहर पोस्टर चस्पा कर दिया। ऐसे में सफाई कर्मचारी तो दूर आसपास रहने वाले घर के पास से नहीं गुजरते थे।
बीमार होने के बावजूद भी रिपोर्ट बनाकर भेजती थी
जवाहर नगर की रहने वाली और सीनियर नर्सिंग ऑफिसर पुष्पा ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान मरीजों की रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी थी। सुबह आठ बजे अस्पताल में आने के बाद मरीजों के पास जाकर उनकी रिपोर्ट तैयार करना उसके बाद 10 और 4 बजे रिपोर्ट भेजना। मरीजों की देखभाल करना। इस दौरान बीमार हो गई और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। वहीं से रिपोर्ट भेजनी पड़ती थी। दिन हो या रात कोई आराम नहीं मिला। गर्मी के मौसम में पीपीटी किट पहनने से जान आफत में आ जाती थी।
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दो साल बेटी को नाना के पास छोड़ा
सेक्टर 14 में रहने वाली और इंफेक्शन कंट्रोल नर्सिंग ऑफिसर अनुराधा ने बताया कि आइसोलेशन वार्ड में मरीजों की देखभाल में ड्यूटी थी। सारा दिन पीपीटी किट पहन कर मरीजों के बीच रहते थे। घर जाने से डरते थे। सोचते थे कि घर गए तो कहीं बच्चे और अन्य संपर्क में न आ जाए। बेटी को उसके नाना के पास भेज दिया, ताकि वह संक्रमण से बची रहे। वीडियो कॉल के जरिये बात होती थी। घर जाने के बाद सबसे अलग रहना पड़ता था। दो साल ऩाना के यहां रहने के बाद अब बेटी ने उनके पास जाने से इंकार कर देती है।
घरवालों से फोन पर होती थी बात
बरवाला की रहने वाली नर्सिंग ऑफिसर अश्वनी ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान कोरोना वार्ड में ड्यूटी थी। दिन रात कोरोना के मरीज आ रहे थे। भय के कारण परिजन भी मिलने अंदर नहीं आते थे। नर्सिंग को ही उनकी देखभाल करनी पड़ती थी। हमें भी कोरोना फैलने का डर लगा रहता था, लेकिन, हमारा फर्ज पहले मरीजों की देखभाल करना है। महामारी के दौरान घरवालों से दूर यहीं पर रहना पड़ता था। फोन पर ही घरवालों से बात होती थी। काफी कुछ सहा है कोरोना महामारी के दौरान।
घर में रह कर नहीं मिल पाते थे अपनों से
सीनियर नर्सिंग ऑफिसर शर्मिली ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान आपातकालीन विभाग में ड्यूटी थी। उसके बाद 15 दिन आइसोलेन वार्ड में ड्यूटी लगती। वहां पर पीपीटी किट पहन कर रहना पड़ता था। उसमें काफी गर्मी लगती थी। सात साल की बेटी सिमरण को दादी के पास भेज दिया। घर जाने के बाद सीधे ऊपर वाले कमरे में चली जाती। घर में रह कर भी अपनों से दूर रहते थे। कुछ समय बाद बेटी घर आई और मुझे देखकर रोनी लगी। बार बार पास आने की जिद करती, जैसे तैसे कर उसे अपने से दूर रखा।
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