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चौ. देवीलाल अस्पताल को 'संजीवनी' की जरूरत

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हिसार। कोरोना की दूसरी लहर में बनाए गए चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल को खुद संजीवनी की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग ने छह महीने के शेड्यूल के हिसाब से बनाए गए अस्पताल को 90 दिन से पहले ही समेटना शुरू कर दिया गया है। अस्पताल के लिए बचाए चार ब्लॉक में से 72-72 बेड के दो ब्लॉक बंद कर दिए गए हैं। वहीं, स्थायी स्टाफ का यहां से तबादला कर दिया है और अनुबंधित कर्मचारियों को हटाया जा चुका है। अब दो बड़े ब्लॉक को शिफ्ट करने के लिए मुख्यालय से अनुमति मांगी गई है।
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जिंदल मॉडर्न स्कूल में अस्थायी तौर पर बने संजीवनी अस्पताल में चार ब्लॉक बनाए गए थे। इसमें से दो ब्लॉक स्कूल के अंदर कमरों में बनाए गए थे। इन दोनों ब्लॉक को खाली कर स्कूल प्रशासन को सौंप दिया गया है। 200 व 150 बेड के दो बड़े ब्लॉक को शिफ्ट करने की तैयारी है। अस्पताल में रखी गई दवा को नागरिक अस्पताल भिजवा दिया गया है। यह अस्पताल 17 दिन में तैयार किया गया था। 28 करोड़ खर्च करने पर भी यहां सिर्फ 280 मरीजों का उपचार हो सका। बता दें कि 17 मई को अस्पताल का उद्घाटन करने के लिए मुख्यमंत्री मनोहरलाल आए थे।
इसलिए जिंदल स्कूल में बनाया था अस्पताल
दूसरी लहर के समय ऑक्सीजन का काफी संकट चल रहा था। जिंदल इंडस्ट्रीज में उपलब्ध ऑक्सीजन को बिना सिलिंडर सीधे पाइपलाइन के जरिये मरीजों तक पहुंचाने की सोच रखते हुए अस्थायी अस्पताल को जिंदल स्कूल के परिसर में स्थापित किया गया था। पीडब्ल्यूडी ने अस्पताल को साउथ बाईपास पर स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था। अस्थायी अस्पताल में इंटनर्शिप वाले 100 एमबीबीएस चिकित्सक भेजे गए थे। 45 नवनियुक्त फार्मासिस्ट लगाए गए थे। इसके अलावा करीब 100 नर्सिंग स्टाफ और कुछ अनुबंधित कर्मियों को नियुक्त किया गया था।
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हमने 72-72 बेड के दो ब्लॉक खाली कर दिए हैं। अब दोनों वार्ड स्कूल को सौंपे जाएंगे। वहां से बेड एवं दवा नागरिक अस्पताल में शिफ्ट कर दी गई है। दो ब्लॉक के बारे में उच्च अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार है। - डॉ. धर्मेंद्र सुधीर, ओवरऑल प्रभारी, संजीवनी अस्पताल, हिसार
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