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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड बनाया जाएगा: जेपी दलाल

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कृषि मंत्री जे.पी. दलाल, कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज व मेले में प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए - फोटो : Hisar
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हिसार। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में बोर्ड बनाया जाएगा। प्राकृतिक खेती से यदि किसान को पैदावार का नुकसान होता है तो उसकी भरपाई तीन साल तक सरकार की ओर से की जाएगी। प्राकृतिक खेती से किसान की लागत कम होगी और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। यह बात कृषि मंत्री जेपी दलाल ने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के किसान मेला के समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि किसानों को संबोधित करते हुए कही।
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उन्होंने कहा कि हमारे खाद्यान्न भंडार भरे हुए हैं। अब कृषि की पैदावार बढ़ाने की जगह कृषि उपज की गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत है। अधिक पैदावार लेने के लिए कृषि रसायनों का बहुत अधिक प्रयोग हो रहा है, जिससे पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ अनाज भी रसायन युक्त हो रहा है, जिसका असर मानव जाति के स्वास्थ्य पर देखा जा रहा है। किसानों को उपज का बेहतर भाव दिलाने के लिए गन्नौर में 8 हजार करोड़ रुपये की लागत से विश्वस्तर का कृषि उपज बिक्री केंद्र बनने जा रहा है। किसानों को फसल मुआवजा दिलवाने में सरकार बिजाई से लेकर मुआवजा दिलवाने तक पूरी तरह पैरवी करेगी। बीते पांच साल में फसल मुआवजे का 5200 करोड़ रुपया किसानों के खाते में डाला गया है। प्रदेश में प्रगतिशील किसान प्राधिकरण भी बनाया जाएगा। जिससे प्रगतिशील किसानों को प्रोत्साहित और मार्गदर्शन किया जाएगा। कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय प्राकृतिक खेती को लोकप्रिय बनाने के लिए अग्रसर है। इसके लिए सघन अनुसंधान कार्य किया जा रहा है। एक क्लिक से ही फसल व मौसम संबंधित जानकारी तुरंत हरियाणा के हर कोने में पहुंच जाती है। कार्यक्रम में लुवास के कुलपति डॉ. विनोद कुमार वर्मा भी उपस्थित थे। कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की पुस्तक का विमोचन भी किया।
22.5 लाख के बीज खरीदे...50 हजार का साहित्य....
कृषि मेला के संयोजक विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने बताया कि मेले में किसानों ने करीब 22.5 लाख रुपये के खरीफ फसलों व सब्जियों की उन्नत व सिफारिश शुदा किस्मों के प्रमाणित बीज और फलदार पौधों की नर्सरी खरीदी। किसानों ने 50 हजार रुपये का कृषि साहित्य भी खरीदा। मिट्टी के 2250 व पानी के 1620 नमूनों की जांच की गई।
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प्रदर्शनी रही विशेष आकर्षण -
कृषि-औद्योगिक प्रदर्शनी किसानों के आकर्षण का विशेष केंद्र रही। प्रदर्शनी में कुल 230 स्टॉल लगाए गए थे। आर्गेनिक फार्मिंग के लिए लगाए गए स्टाल पर 3 हजार से अधिक किसानों ने पूछताछ की। काफी किसानों ने इसके बीज के बारे में जानकारी मांगी।
आकर्षण स्टालों को दिए पुरस्कार -
सह निदेशक विस्तार डॉ. कृष्ण यादव ने बताया कि सरकारी संस्थानों में एचएयू एक्सपिरीएंस लर्निंग प्रोग्राम को प्रथम स्थान मिला। सब्जी विभाग व एग्री टूरिजम को दूसरा स्थान मिला। होम साइंस कॉलेज को तीसरा पुरस्कार प्रदान किया गया। मिले-जुले ग्रुप में लुवास को पहला स्थान मिला। इफको को दूसरा व एमएचयू को तीसरा स्थान मिला। स्वंय सहायता समूह/प्रगतिशील किसान समूह में वेदांता मशरूम फार्म को प्रथम स्थान मिला। कांबोज हनी बी फार्म को दूसरा और हरियाणा गऊ सेवा समिति को तीसरा स्थान दिया गया।
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