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इतिहास गवाह सै भारत मां का वीर कदे बी डोल्या ना...

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हिसार। कोरोना महामारी के दौरान लगे लंबे लॉकडाउन का देहात के लोक कलाकारों पर विपरीत प्रभाव पड़ा। कलाकार बेरोजगार हो गए। इस दौरान कलाकारों ने मंदिरों में जागरण के कार्यक्रम, रागन, सत्संग सहित अन्य कार्यक्रम करके अपना गुजर बसर किया। कलाकारों ने कहा कि इतिहास गवाह सै भारत मां का वीर कदे बी डोल्या ना।
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यह बात शुक्रवार को स्थानीय कलाकारों अमर उजाला कार्यालय में कोरोना काल में कलाकारों के हालात और हरियाणवी संस्कृति विषय पर आयोजित परिचर्चा में कही। परिचर्चा का संचालन हांस्य कवि जयभगवान लाडवाल ने किया। परिचर्चा में हरियाणवी लोक गायक सांगी निरंजन सिंह, हरियाणवी लोक गायक व लेखक सतीश बलमियां, लोक गायक मास्टर सुदंर सिंह नागर, हरियाणवी लोक संगीत व शास्त्रीय संगीत के पीएचडी स्कॉलर रविंद्र नागर, हांस्य कवि जयभगवान लाडवाल, कोरियोग्राफर व डायरेक्टर रॉकी डेन, हरियाणवी कलाकार कैलाशचंद्र तोबड़िया व अदाकार सेवानाथ ने शिरकत की। कलाकारों ने अपनी राय देते हुए कहा कि कलाकारों का एक क्राइट एरिया बनाकर व उचित मापदंड तैयार करके उनके लिए सरकारी योजनाएं चलानी चाहिए। युवाओं को हरियाणवी संस्कृति के करीब लाने के लिए गायक, कलाकार व लेखक सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं।
मेरा झज्जर जिले में बिसान गांव हैं। मैं अब हिसार में ही रहता हूं। फिलहाल जनसंपर्क विभाग हिसार में कार्यरत हूं। मुझे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच पर गीत गाने का मौका मिल चुका है। कर्मभूमि अवॉर्ड, जनसंचार पुरस्कार व हरियाणा कला रत्न अवॉर्ड मिल चुका है। रेडियो व आकाशवाणी की ओर से भी ए ग्रेड के गायक का अवॉर्ड मिला हुआ है। हरियाणवी फिल्म पगड़ी का टाइटल सोंग औकात सै पगड़ी सौगात सै पगड़ी गीत गाया है। हरियाणवी तर्ज में झूलणा, निहालदे, अलिबख्श, आल्हा, सवैया, काफिया, बहरेतबील, लहरा सहित बार-त्योहार के गीत हमारी हरियाणवी संस्कृति की पहचान है। - सांगी निरंजन सिंह, हरियाणवी लोक गायक, जनसंपर्क विभाग हिसार
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कोरोना काल में देहात के कलाकार जैसे गायक, ढोलक, तबला, हारमोनियम सहित अन्य कलाकार बेरोजगार हो गए। मेरी सरकार से प्रार्थना है कि कलाकारों के प्रोत्साहन देने के लिए सरकार एक क्राइट एरिया बनाए व मापदंड तय करें, ताकि कला व संस्कृति से जुड़े कलाकारों के लिए सरकार की ओर से पेंशन सहित अन्य योजनाओं शुरू जा सकें। चाहे कितना भी बुरा वक्त आए एक कलाकार को हौसला नहीं तोड़ना चाहिए। सतीश बलमियां, हरियाणवी लोक गायक, संगीतकार व लेखक
हरियाणवी संस्कृति एक समृद्ध संस्कृति है, जिसका पूरे भारत देश के साथ-साथ विदेशों में भी ढंका है। हरियाणवीं सांग, रागनी, हरियाणवी वेशभूषा, हरियाणवीं हास्य व्यंग्य और खान-पान व हाजिर जवाबी हमारी संस्कृति के विशेष अंग है। हरियाणवी बोली में जन्म से लेकर मृत्यु तक के गीत गाए जाते हैं। सरकार ने भी आजादी का अमृत महोत्सव मनाकर कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका दिया है। कोरोना काल में पूरा जनजीवन प्रभावित हुआ है। इसका बुरा असर कलाकारों पर भी पड़ा है। - सुंदर सिंह नागर, लोक गायक, जनसंपर्क विभाग हिसार
कोरोना काल में कलाकार बेरोजगारी के कगार पर आ गए थे। डांस क्लास व हर प्रकार के प्रोग्राम होने बंद हो गए व इन्हीं से कलाकारों को आय होती थी। मैं भी बेरोजगार हो गया था। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मेरी पत्नी ने मेरा हौसला बढ़ाया। मेरी मां ने मुझे प्रेरित किया। मैंने मेरी पत्नी के सहयोग से लगातार 20 दिन तक यूट्यूब पर फास्ट फूड बनाना सीखा। अपना नया कार्य शुरू किया। जिंदगी में कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। - रॉकी डेेन, कोरियोग्राफर व डायरेक्टर
कोरोना ने कलाकारों की कमर तोड़ कर रख दी। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देहात व लोकल कलाकारों पर पड़ा है। क्योंकि लोकल कलाकारों का गुजारा निरंतर होने वाले कार्यक्रमों से चलता था। कोरोना में इस प्रकार के कार्यक्रम होने बंद हो गए। ऐसे में कलाकार भी बेरोजगार हो गए। हमने नाटकों को सीरीज शुरू की है। इसमें हमने इस प्रकार के मुद्दों सहित सामाजिक मुद्दों पर नाटक बनाए हैं। - कैलाश चंद्र तोबड़िया, हरियाणवी कलाकार
हंसना व हंसाना एक कला है। ये कला सबसे ज्यादा हरियाणा के कलाकारों में होती है। हंसने से शरीर स्वस्थ रहता है। एक कवि व कलाकार लोगों को हंसाने का काम करते हैं, लेकिन कोरोना काल में ये कलाकार व कवि दोनों ही बेरोजगार हो गए। मेरी सरकार से मांग है कि कोई उचित मापदंड तैयार करके कलाकारों के लिए योजनाएं लागू करें। - जय भगवान लाडवाल, हास्य कवि
सरकार को चाहिए की एक क्राइट एरिया बनाकर व उचित मापदंड तैयार करके कलाकारों के लिए सरकारी योजनाएं आदि चलाए। क्योंकि कलाकार संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है, ताकि कलाकारों को आर्थिक सहयोग मिलता रहे। हमें चाहिए कि हमं युवाओं को हरियाणवीं संस्कृति के करीब लाएं। इसके लिए हमारे हरियाणवी गायक, कलाकार व लेखक सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं। - रविंद्र नागर, पीएचडी स्कॉलर, एमडीयू रोहतक
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