बालसमंद में गोशाला कमेटी और पंचायत गोशाला को चारा काटने की मशीन देते दानदाता।
बालसमंद। बालसमंद गोशाला वर्ष 2012 में शुरू हुई। यह 27 एकड़ क्षेत्र में फैली है। इसमें 362 नंदी, 588 गाय और गाय के 116 बच्चों समेत 1,060 पशु हैं। यहां रोजाना करीब एक क्विंटल दूध की बिक्री स्थानीय ग्रामीणों को की जाती है। बालसमंद पंचायत और कमेटी ने गोशाला में चारा काटने की मशीन दान दी है।
गोशाला प्रधान अनिल दत्त बताते हैं कि गायों की देखभाल के लिए गोशाला में 35 कर्मचारी रखे गए हैं। क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी राजेंद्र गावड़िया ने इस गोशाला के सालभर के चारे का खर्च उठाया है। अन्य लोग भी गोशाला में हरसंभव सहयोग देते हैं। इसलिए गोबर की खाद आसपास के किसान मुफ्त ले जाते हैं।
आमजन से एक रुपया, एक रोटी का सहयोग लिया जाता है। गांवों से चारे और रोटी लाने के लिए गोशाला की तरफ से एक गाड़ी लगाई गई है। अध्यक्ष ने बताया कि अधिकतर गोशालाओं में मेडिकल सुविधाएं नहीं हैं जबकि गांव के पशु चिकित्सक डाॅ. रविंद्र श्योराण गायों की देखभाल के लिए रोजाना इस गोशाला में दो घंटे के लिए आते हैं। प्रदेश की सबसे बड़ी गोशाला डोभी में हॉस्पिटल बिल्डिंग, वीएलडीए और वीएस की जरूरत है। इसी प्रकार बालसमंद की गोशाला में भी दो शेड, एम्बुलेंस और डॉक्टर चाहिए।