परिजनों में डर है। पत्नी, बहन का कॉलेज बंद हो गया है और अब हमें अपने भविष्य का कुछ पता नहीं है। तालिबान क्या करेगा और शासन कैसा होगा, यह अनुमान से परे है। पता नहीं भारत में पढ़ने वाले हम लोगों के साथ उनका व्यवहार कैसा होगा और वह हमारे भविष्य के बारे में कैसा फैसला लेंगे। हम चाहते हैं कि भारत सरकार हमारी मदद करे। - जिया उल हक, बाघलान निवासी एवं एचएयू के विद्यार्थी
घर हर रोज बात हो रही है और परिजन सहमे हुए हैं। कर्मचारियों ने कार्यालयों में जाना बंद कर दिया है। वहां के लोगों और बाहर रह रहे हम जैसे लोगों को भविष्य की चिंता सता रही है। कुलपति को पत्र दिया था कि जब तक हमारी पढ़ाई पूरी नहीं होती, हमारी छात्रवृत्ति बहाल की जाए, ताकि वित्तीय समस्या का सामना न करना पड़े। सरकार से निवेदन है कि हमारी पीएचडी की पढ़ाई का प्रबंध कर दे। - मोहम्मद रफीक, काबुल निवासी एवं एचएयू के विद्यार्थी
जब तक स्थिति ठीक न हो, विद्यार्थी यहां रह सकते हैं: कुलपति
एचएयू के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने विद्यार्थियों को हौसला देते हुए कहा कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन हर समय अपने विद्यार्थियों के साथ है। जब तक अफगानिस्तान में स्थिति सामान्य नहीं हो जाती तक वे यहां रह सकते हैं और उनकी तरफ से हर संभव मदद की जाएगी। स्नातकोत्तर अधिष्ठाता डॉ. अतुल ढींगड़ा ने कहा कि अफगानिस्तान के विद्यार्थियों को हर प्रकार की मदद मुहैया करवाई जा रही है।
डीएसडब्ल्यू ने जाना हाल-चाल
छात्र कल्याण निदेशक डॉ. देवेंद्र सिंह दहिया ने मंगलवार को विद्यार्थियों से बातचीत की और उनका व उनके परिजनों का हाल-चाल जाना। विद्यार्थियों ने इस दौरान उन्हें कहा कि उन्हें अपने परिजनों की चिंता है। त्रिवेणी इंटरनेशनल ब्वायज हॉस्टल के वार्डन डॉ. अनिल वत्स व डॉ. सुरेंद्र यादव लगातार इन विद्यार्थियों की शैक्षणिक व अन्य गतिविधियों में मदद कर रहे हैं।