क्रांतिकारियों के साथ कैबलरी के 400 घुड़सवार व शहजादा मुहम्मद आजम भी था। क्रांतिकारियों ने नागोरी गेट के मुख्य द्वार पर जोरदार हमला करते हुए कुल्हाड़ियों से गेट तोड़ना शुरू किया। किले को बचाने के लिए अंग्रेजी सेना ने गोलियां बरसाई। काफी देर तक युद्ध के बाद गोला बारूद के बल पर क्रांतिकारियों को पीछे हटाने में सफल हो गई। अंग्रेजों ने किले के दरवाजों को मजबूती से बंद कराते हुए 350 सैनिक तैनात किए। पीछे हटे क्रांतिकारी कुछ समय बाद दूसरे रास्तों को अपनाते हुए एक बार फिर से किले के पश्चिमी भादरा गेट पर पहुंचे। इस गेट पर भी काफी देर तक युद्ध चला।
क्रांतिकारियों ने भी डोगरा मोहल्ला की ओर से काफी देर तक गोलीबारी की। क्रांतिकारियों के पास हथियारों के नाम पर गंडासे, भाले, जेली, कुल्हाड़ी मुख्य थे। कुछ बंदूक भी क्रांतिकारियों ने हासिल कर ली थी। इस युद्ध में करीब 300 क्रांतिकारियों की लाश नागोरी गेट के आसपास मिली। इतिहास की किताबों के अनुसार इस युद्ध में करीब 500 से अधिक क्रांतिकारी मारे गए।
260 से अधिक घायल हुए। कुछ क्रांतिकारियों को जिंदा पकड़ लिया गया। जिन्हें भादरा गेट के सामने रोड रोलर से कुचलवा कर मार डाला। अंग्रेेजी सेना के 28 जवान भी क्रांतिकारियों के साथ मिल गए थे। अंग्रेजी सेना को जब इस बारे में पता लगा तो उन्होंने 5 सैनिकों की गोली मारकर हत्या कर दी। 23 को गिरफ्तार कर लिया। मुकदमे की औपचारिकता के बाद इन 23 सैनिकों को भी फांसी दे दी गई।
19 अगस्त 1857 को हिसार में क्रांति शुरू हुई थी। नागोरी गेट पर भीषण युद्ध हुआ। अभिलेखागार विभाग के पास पूरे प्रमाण हैं। अंग्रेजों की ओर से किए गए पत्राचार भी हमारे पास मौजूद हैं। 19 अगस्त से सितंबर माह तक कई बार क्रांतिकारी अंग्रेजों से टकराए थे। अनिल कुमार, सहायक निदेशक, अभिलेखागार विभाग, हिसार
बीकानेर आर्मी, टोहाना हार्स की टुकड़ी अंग्रेजों की ओर से लड़े थे। 123 क्रांतिकारी रोड रोलर के नीचे कुचले गए थे। इसका उल्लेख अंग्रेेेजों के लेटर में भी नहीं किया गया। जिसे हम तलाकी गेट के नाम से पहचानते हैं। अंग्रेजों की ओर से लड़ते हुए 152 सैनिक मारे जाने की जानकारी है। करीब 650 क्रांतिकारी इस युद्ध में मारे गए थे। - महेंद्र सिंह, प्रोफेसर इतिहास विभाग, दयानंद महाविद्यालय , हिसार